Alert: शहडोल। लंपी वायरस से उबर रहे शहडोल जिले में अब मवेशियों के लिए एक और बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है। जिले में इन दिनों एफएमडी (Foot and Mouth Disease) यानी मुंहपका-खुरपका रोग के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे गाय-भैंसों को काफी परेशानी हो रही है।
इस बीमारी में मवेशियों के मुंह में छाले, तेज बुखार, पैरों में फफोले, लार टपकना और कभी-कभी कीड़े पड़ने जैसी समस्याएं हो जाती हैं, जिससे पशु खाना-पीना बंद कर कमजोर हो जाते हैं।
स्थिति नियंत्रण में, 1–2% ही केस
पशुपालन विभाग शहडोल के उपसंचालक अशोक कुमार सिंह ने बताया कि यह एक वायरल और संक्रामक बीमारी है, जो पशुओं के आपसी संपर्क से फैलती है।
उन्होंने कहा,
“फिलहाल जिले में स्थिति सामान्य है। केवल 1–2 प्रतिशत ही एफएमडी के मामले सामने आए हैं। जिन जगहों पर केस मिले हैं, वहां स्क्रीनिंग कराकर टीकाकरण कराया जा रहा है।”
साल में दो बार अनिवार्य टीकाकरण
पशुपालन विभाग के अनुसार, जिले के सभी चार महीने से अधिक उम्र के गाय-भैंसों का साल में दो बार एफएमडी का टीका लगाया जाता है।
विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध है और टीकाकरण अभियान लगातार चल रहा है।
रोग के प्रमुख लक्षण
इस बीमारी को ग्रामीण क्षेत्रों में ‘गोडहा रोग’ भी कहा जाता है। इसके प्रमुख लक्षण हैं—
- मुंह में छाले
- तेज बुखार
- मुंह से अधिक लार गिरना
- खाना बंद कर देना
- पैरों और शरीर पर फफोले
- कमजोरी
अधिकारियों के अनुसार यह बीमारी आमतौर पर जानलेवा नहीं होती और समय पर इलाज से पशु ठीक हो जाते हैं।
पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह
अगर किसी पशु में एफएमडी के लक्षण दिखें तो उसे तुरंत दूसरे पशुओं से अलग रखें और पशुपालन विभाग को सूचना दें।
जिस गांव में बीमारी मिले, वहां आसपास के गांवों में भी तुरंत टीकाकरण कराना जरूरी है।
भारी आर्थिक नुकसान की आशंका
अशोक कुमार सिंह ने बताया कि एफएमडी से संक्रमित पशुओं का दूध उत्पादन तेजी से घट जाता है। गर्भवती गाय-भैंसों में गर्भपात तक हो सकता है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी कारण केंद्र और राज्य सरकार साल में दो बार एफएमडी टीकाकरण अभियान चला रही है।
साभार….
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