बैतूलबाजार में 9 लाख रुपए की लागत से किया गया था निर्माण
Sample: बैतूल। नगर परिषद बैतूल क्षेत्र में विधायक निधि से निर्मित सीसी सडक़ गुणवत्ता जांच में फेल हो गई है। सामुदायिक भवन के पास लगभग 9 लाख रुपये की लागत से बनी इस सडक़ की कोर कटिंग कर प्रयोगशाला में भेजे गए सैंपल उपयोग योग्य नहीं पाए गए। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच में फेल हो गया सेम्पल
जानकारी के अनुसार, यह सडक़ विधायक निधि से स्वीकृत हुई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने कार्य के दौरान निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया। सीमेंट और गिट्टी का अनुपात सही न होने के कारण सडक़ की मजबूती बेहद कमजोर पाई गई। स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जो कोर सैंपल जांच के लिए निकाला गया, वह जमीन पर गिरते ही मिट्टी के ढेले की तरह टूटकर बिखर गया।
अन्य निर्माण कार्य भी संदेह के घेरे में
एक ही कार्य की जांच में गुणवत्ता की यह स्थिति सामने आने के बाद नगर परिषद क्षेत्र में विधायक निधि से कराए गए अन्य निर्माण कार्यों पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है। नागरिकों का कहना है कि यदि सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो और भी अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं। उल्लेखनीय है कि यह सडक़ नगर परिषद अध्यक्ष के सुभाष वार्ड में बनाई गई है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
विधायक हेमंत खंडेलवाल ने जताई नाराजगी
मामले की जानकारी मिलने पर बैतूल विधायक एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि विधायक निधि से स्वीकृत सभी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच अनिवार्य रूप से प्रयोगशाला में कराई जाए तथा गुणवत्ता संतोषजनक पाए जाने पर ही भुगतान किया जाए। कलेक्टर ने भी संबंधित विभागों के प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि विधायक निधि से स्वीकृत कार्यों के सैंपल परीक्षण के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसी क्रम में नगर परिषद बैतूलबाजार में बनी सीसी सडक़ की जांच कराई गई, जिसमें सैंपल फेल हो गया है।
नागरिकों ने की कार्रवाई की मांग
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद नागरिकों में नाराजगी है और दोषी निर्माण एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए स्वीकृत राशि का दुरुपयोग न केवल जनहित के साथ खिलवाड़ है, बल्कि इससे जनप्रतिनिधियों की छवि भी प्रभावित होती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है और अन्य निर्माण कार्यों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।
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