Digital Siege: भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस अब अपराध, दुर्घटना और कानून-व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील इलाकों की डिजिटल घेराबंदी कर रही है। यह काम जियो-टैगिंग के माध्यम से किया जा रहा है, जिसे मध्य प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम की जीआईएस यूनिट अंजाम दे रही है। प्रदेश के 35 प्रमुख जिलों में अब तक 1314 स्थान चिन्हित कर उन्हें जियो-टैग किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस पहल से अपराध नियंत्रण, आपातकालीन प्रतिक्रिया और पुलिस की निगरानी व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। अब तक पुलिस के पास केवल संवेदनशील इलाकों की सूची थी, लेकिन सटीक डिजिटल नक्शा और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी नहीं होने से कई बार बाहरी फोर्स को अंदर तक पहुंचने में देर हो जाती थी।
एमपी जियो पोर्टल पर होगा पूरा डाटा
नई व्यवस्था के तहत हर संवेदनशील स्थान का विस्तृत डिजिटल मैप तैयार किया जा रहा है। इसमें
- मुख्य प्रवेश मार्ग
- वैकल्पिक रास्ते
- संभावित बाधाएं
- भीड़ जुटने वाले इलाके
- फोर्स के फंसने की आशंका वाले प्वाइंट
को अलग-अलग लेयर में चिह्नित किया जा रहा है। पूरा डाटा एमपी जियो पोर्टल पर अपलोड होगा, जिससे पुलिस अधिकारी कंट्रोल रूम से लाइव लोकेशन देख सकेंगे और फील्ड फोर्स को सटीक निर्देश दे पाएंगे।
20 जिलों में काम पूरा
भोपाल, इंदौर, उज्जैन और सीहोर समेत करीब 20 जिलों में जियो-टैगिंग का काम पूरा हो चुका है। राजधानी भोपाल में 32 थानों के 100 से अधिक संवेदनशील स्थान पहले ही जीआईएस से टैग कर दिए गए हैं। हर थाने के तहत तीन से चार ऐसे इलाके चुने गए हैं, जहां पहले तनाव, भीड़ नियंत्रण या फोर्स की मूवमेंट में दिक्कतें आई थीं।
ऐसे काम करेगा यह सिस्टम
- सर्वे और जियो-टैगिंग: पुलिस व जीआईएस टीम मौके पर जाकर मैप तैयार करती है
- डिजिटल लेयर: मार्ग, संवेदनशील प्वाइंट और बाधाएं अलग-अलग लेयर में
- डाटा अपलोड: पूरा नक्शा एमपी जियो पोर्टल पर
- लाइव एक्सेस: कंट्रोल रूम व अधिकारी यूजर आईडी से देख सकेंगे
- ऑपरेशन प्लानिंग: आपात स्थिति में एंट्री-एग्जिट और बैकअप रूट पहले से तय
डीसीपी श्रद्धा तिवारी के मुताबिक,
“संवेदनशील स्थानों की जियो-टैगिंग से आपात स्थिति में फोर्स की मूवमेंट कहीं अधिक तेज और सुरक्षित हो सकेगी।”
साभार…
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