धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था मजबूत करने की तैयारी
Announcement: भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि अब राज्य के विश्वविद्यालयों में “मंदिर प्रबंधन” (Temple Management) को एक विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और राज्य की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। इंदौर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि मंदिर प्रबंधन को उच्च शिक्षा से जोड़ते हुए इस विषय पर अकादमिक पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
वित्तीय, प्रशासनिक और सुरक्षा प्रबंधन की होगी पढ़ाई
मुख्यमंत्री के अनुसार इन पाठ्यक्रमों में सिर्फ धार्मिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि मंदिरों की:
- वित्तीय व्यवस्था
- प्रशासनिक प्रबंधन
- सुरक्षा प्रबंधन
- सांस्कृतिक और पारंपरिक संरक्षण
जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उज्जैन स्थित विक्रम विश्वविद्यालय ने इस दिशा में पहल करते हुए मंदिर प्रबंधन विषय पर डिप्लोमा और स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम शुरू कर दिए हैं। इन कोर्सों में विद्यार्थियों को विशेषज्ञों द्वारा सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
13 तीर्थस्थलों पर बनेंगे धार्मिक गलियारे
मुख्यमंत्री ने कहा कि मंदिर हमारी आस्था और विश्वास के केंद्र रहे हैं। सही प्रबंधन के जरिए धार्मिक स्थलों को पर्यटन और रोजगार का बड़ा केंद्र बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उज्जैन के महाकाल महालोक की तर्ज पर प्रदेश के 13 प्रमुख तीर्थस्थलों पर धार्मिक गलियारे विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही सरकार ने महाकाल महालोक परिसर में लगी फाइबर की मूर्तियों को हटाकर उनकी जगह पत्थर और धातु की प्रतिमाएं स्थापित करने का निर्णय लिया है।
उज्जैन में ही गढ़ी जा रही हैं नई प्रतिमाएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला पर आधारित नई प्रतिमाएं उज्जैन में ही तैयार की जा रही हैं। इससे स्थानीय शिल्पकारों और कारीगरों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
दिव्यांग खेलों को भी मिल रहा बढ़ावा
रविवार को भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश दिव्यांग खेलों का प्रमुख केंद्र बन रहा है और यहां के खिलाड़ी देश-विदेश में प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।
शिक्षा, धर्म और पर्यटन का संगम
राज्य सरकार का मानना है कि मंदिर प्रबंधन को व्यवस्थित और पेशेवर रूप देने से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। इससे न केवल रोजगार सृजन होगा, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अब यह देखना होगा कि विश्वविद्यालयों में शुरू हो रहे ये नए पाठ्यक्रम युवाओं के लिए कितने आकर्षक और प्रभावी साबित होते हैं।
साभार…
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