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Severe shortage: मुलताई अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी

मुलताई अस्पताल में

पोस्टमार्टम के लिए शव प्रभात पट्टन भेजना पड़ा

Severe shortage: मुलताई। लगभग 200 गांवों के मरीजों और घायलों के इलाज की जिम्मेदारी संभालने वाले मुलताई के शासकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति इन दिनों बेहद खराब हो गई है। अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के कारण एक मृतक का पोस्टमार्टम तक नहीं हो सका और शव को प्रभात पट्टन अस्पताल भेजना पड़ा।

बताया जा रहा है कि बिरुल बाजार निवासी डॉ. राजू खाकरे (55) की गुरुवार सुबह सड़क हादसे में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार वे बाइक से बैतूल जा रहे थे, तभी साईंखेड़ा के पास उनकी बाइक बोरिंग मशीन से टकरा गई, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम के लिए डॉक्टर नहीं मिले

हादसे के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मुलताई के सरकारी अस्पताल लाया गया, लेकिन अस्पताल में पोस्टमार्टम करने के लिए कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। मजबूरी में शव को प्रभात पट्टन अस्पताल भेजना पड़ा।

पूरे अस्पताल में सिर्फ तीन डॉक्टर

जानकारी के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बीएमओ गजेंद्र मीणा सहित कुल तीन ही डॉक्टर पदस्थ हैं। गुरुवार को अस्पताल में केवल दो महिला डॉक्टर मौजूद थीं, जो पोस्टमार्टम नहीं कर सकती थीं। बीएमओ भी उस समय बाहर थे, जिसके चलते शव को दूसरे अस्पताल भेजने का निर्णय लिया गया।

पहले भी उठ चुकी है समस्या

स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा पहले भी उठाया जा चुका है। कुछ समय पहले अस्पताल पहुंचे प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल को भी इस समस्या से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों को इलाज के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

200 गांवों की जिम्मेदारी, लेकिन सुविधाएं नाकाफी

मुलताई का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लगभग 200 गांवों के लोगों के इलाज का मुख्य केंद्र है। ऐसे में यहां डॉक्टरों और संसाधनों की कमी गंभीर चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्रीय राज्य मंत्री और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष के क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की ऐसी बदहाल स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई।

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