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Big challenge: जेडीयू में शामिल हुए निशांत कुमार, पिता की विरासत संभालना बड़ी चुनौती

जेडीयू में शामिल हुए निशांत कुमार,

संगठन मजबूत करने से लेकर वोट बैंक बचाने तक कई मोर्चों पर देनी होगी परीक्षा

Big challenge: नई दिल्ली। Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar ने औपचारिक रूप से Janata Dal (United) (जेडीयू) में शामिल होकर सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया है। पार्टी के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की लंबे समय से मांग थी कि निशांत राजनीति में आएं और संगठन को मजबूत करें। हालांकि उनके सामने पिता की सियासी विरासत को संभालना आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जेडीयू में शामिल होने के बाद निशांत कुमार के सामने कई बड़ी चुनौतियां खड़ी होंगी।

1. कोर वोट बैंक को एकजुट रखना

नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर में अति पिछड़ा और गैर-यादव पिछड़ा वर्ग को एकजुट करने की रणनीति अपनाई। 1994 में Lalu Prasad Yadav से अलग होने के बाद उन्होंने Samata Party के साथ चुनाव लड़ा और धीरे-धीरे मजबूत राजनीतिक आधार बनाया। ऐसे में निशांत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि जेडीयू के पारंपरिक वोट बैंक में किसी तरह का बिखराव न होने दें।

2. महिला वोटर्स का भरोसा बनाए रखना

2005 में मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण पर खास जोर दिया। शराबबंदी जैसे फैसले और महिलाओं के लिए कई योजनाओं के कारण हर चुनाव में महिला वोटर्स का समर्थन उन्हें मिलता रहा। ऐसे में निशांत को भी महिलाओं से जुड़ी योजनाओं और मुद्दों पर विशेष ध्यान देना होगा।

3. पार्टी संगठन का भरोसा जीतना

निशांत कुमार को जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं, युवा विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं का भरोसा जीतना होगा। इसके लिए उन्हें लगातार जनता के बीच जाना होगा और संगठन में सक्रिय भूमिका निभानी होगी, ताकि आने वाले समय में उनकी अलग राजनीतिक पहचान बन सके।

4. राजनीति में सक्रियता दिखाना

चर्चा है कि भविष्य में यदि Nitish Kumar राज्यसभा जाते हैं तो बिहार में नई राजनीतिक स्थिति बन सकती है और Bharatiya Janata Party का मुख्यमंत्री भी बन सकता है। ऐसे में चाहे निशांत को सरकार में कोई जिम्मेदारी मिले या न मिले, उन्हें सक्रिय राजनीति में बने रहकर अपनी भूमिका मजबूत करनी होगी।

5. पिता की छवि को आगे बढ़ाना

सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि जिस तरह मतदाताओं ने नीतीश कुमार की साफ-सुथरी छवि और कामकाज पर भरोसा किया, वही भरोसा निशांत कुमार पर भी बने। इसके लिए उन्हें जनता के बीच जाकर संवाद करना होगा, सभाएं और प्रचार करना होगा, ताकि लोग उन्हें भी अपने पिता की राजनीतिक विरासत के योग्य मानें।

साभार….

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