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Administrative law: मध्य प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस के 203 पद खाली, प्रशासनिक व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

मध्य प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और

समय पर प्रमोशन न होने और सीमित भर्ती के कारण बढ़ रही कमी, कलेक्टर-एसपी जैसे पदों पर अवसर भी घटे

Administrative law: भोपाल। मध्य प्रदेश में अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि प्रदेश में आईएएस, आईपीएस और आईएफएस के कुल 203 पद खाली पड़े हैं। इन पदों पर भर्ती न होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और कई अफसरों को एक साथ कई जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं।

केंद्र सरकार द्वारा 1 जनवरी 2025 की स्थिति के अनुसार जारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के 68, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 48 और भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 87 पद रिक्त हैं। इन पदों के खाली रहने से प्रमोटी अधिकारियों को भी कलेक्टर, एसपी और डीएफओ जैसे प्रमुख पदों पर अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।

देशभर में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त

संसद में पेश रिपोर्ट के अनुसार देशभर में भी आईएएस अधिकारियों की कमी बनी हुई है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आईएएस की कुल स्वीकृत संख्या 6,877 है, जबकि वर्तमान में 5,577 अधिकारी ही कार्यरत हैं। यानी करीब 1,300 पद खाली हैं, जो लगभग 18.9 प्रतिशत की कमी दर्शाते हैं।

सिर्फ आईएएस ही नहीं, बल्कि तीनों अखिल भारतीय सेवाओं—आईएएस, आईपीएस और आईएफएस—को मिलाकर कुल 15,169 स्वीकृत पदों के मुकाबले 2,834 पद रिक्त हैं। इससे प्रशासनिक कार्यों पर व्यापक असर पड़ रहा है।

समय पर प्रमोशन से कम हो सकती है कमी

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली भर्ती के अलावा राज्यों में प्रमोशन से भी इन पदों को भरा जा सकता है। लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग, गृह विभाग और वन विभाग में विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने के कारण राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा और राज्य वन सेवा के अधिकारियों को समय पर प्रमोशन नहीं मिल पाता। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार द्वारा तय किए गए प्रशासनिक अनुभव की समय सीमा भी कई बार पदोन्नति में देरी का कारण बन जाती है।

प्रशासनिक कामकाज पर पड़ रहा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वीकृत पदों के खाली रहने से प्रशासनिक और नीतिगत कार्यों की गति प्रभावित होती है। जिला और सचिवालय स्तर पर कई बार एक अधिकारी को एक साथ कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं। संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से हर साल सीमित संख्या में भर्ती होती है, जबकि अधिकारियों की सेवानिवृत्ति लगातार जारी रहती है। राज्य सिविल सेवाओं से आईएएस में पदोन्नति में देरी और कुछ राज्यों द्वारा कैडर संख्या बढ़ाने के बावजूद भर्ती में समानुपातिक वृद्धि न होने से यह अंतर और बढ़ गया है।

दबाव में काम कर रही प्रशासनिक व्यवस्था

अधिकारियों के अनुसार पदों की कमी का सीधा असर फील्ड स्तर पर दिखाई देता है। कई जिलों में वरिष्ठ अधिकारियों पर अतिरिक्त कार्यभार आ जाता है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है और निर्णय प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में समय पर भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जरूरी माना जा रहा है।

साभार…

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