नवरात्रि में प्रतिदिन होंगे धार्मिक अनुष्ठान एवं भजन कीर्तन
Chaitra Navratri: बैतूल। चैत्र नवरात्रि पर्व के शुभ अवसर पर जिले में धार्मिक आस्था का विशेष माहौल देखने को मिल रहा है। बैतूल शहर में मां छिन्नमस्तिका का देश का दूसरा मंदिर स्थापित है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन गया है। मंदिर की स्थापना के बाद से ही प्रतिवर्ष साल भर विधि-विधान से पूजन किया जाता है। मंदिर के व्यवस्थापक एवं पुजारी पं. आनंद अग्रवाल ने बताया कि मां छिन्नमस्तिका का यह मंदिर देश में अपनी तरह का दूसरा प्रमुख स्थल माना जा रहा है। इससे पहले झारखंड की राजधानी रांची के समीप स्थित प्राचीन छिन्नमस्तिका धाम को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। अब मध्यप्रदेश के बैतूल में भी माता का यह स्वरूप स्थापित होने से क्षेत्र की धार्मिक पहचान और मजबूत हुई है।
हवन-पूजन के साथ आरंभ हुई आराधना
नवरात्रि के पहले दिन से ही मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया। श्रद्धालु सुबह से माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। हवन, पूजन और प्रसाद वितरण के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि राम नवमी के दिन 27 मार्च को विशेष पूजा-अर्चना और विसर्जन कार्यक्रम प्रस्तावित है।
माता छिन्नमस्तिका का धार्मिक महत्व
सिद्ध दस महाविद्या श्री-श्री छिन्न मस्तिका मातेश्वरी ट्रस्ट बैतूल (पंजीकृत) के अध्यक्ष नवनीत गर्ग ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां छिन्नमस्तिका शक्ति का उग्र एवं दिव्य स्वरूप मानी जाती हैं। पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि देवी ने अपने भक्तों और सृष्टि की रक्षा के लिए इस स्वरूप में अवतार लिया था। माता को शक्ति, त्याग और आत्मबल का प्रतीक माना जाता है। इस स्वरूप की पूजा विशेष रूप से तांत्रिक साधना और शक्ति आराधना से जुड़ी मानी जाती है।
सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
ट्रस्ट के उपाध्यक्ष राम भार्गव ने बताया कि मंदिर स्थापना के अवसर पर स्थानीय समिति द्वारा नौ दिनों तक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। शहर के विभिन्न धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं की सहभागिता से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। नवरात्रि को लेकर नागरिकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
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