उत्पादन में दुनिया में तीसरा स्थान, 2030 तक 130 अरब डॉलर का लक्ष्य
Global Power: भारत की फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री अब वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बना चुकी है। उत्पादन (वॉल्यूम) के हिसाब से भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है, जबकि मूल्य (वैल्यू) के आधार पर 11वें स्थान पर पहुंच चुका है। देश में 3,000 से अधिक कंपनियां और 10,500 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स इस सेक्टर को मजबूती दे रही हैं।
तेजी से बढ़ रहा घरेलू बाजार
भारत का घरेलू दवा बाजार वर्तमान में करीब 60 अरब डॉलर का है, जो 2030 तक बढ़कर 130 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। आर्थिक सर्वे 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर का कुल कारोबार 4.72 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
निर्यात में लगातार वृद्धि
पिछले 10 वर्षों में दवा निर्यात में औसतन 7% सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा सप्लायर है और दुनिया की कुल सप्लाई में इसकी हिस्सेदारी लगभग 20% है। देश में करीब 60 चिकित्सा श्रेणियों में 60,000 से ज्यादा जेनेरिक दवाएं बनाई जाती हैं।
मजबूत उत्पादन और गुणवत्ता से बढ़ा भरोसा
- मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता
- बढ़ते विदेशी निवेश
- सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं
- सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं
इन सभी कारकों ने भारत को वैश्विक बाजार में मजबूती दी है। साथ ही, अमेरिका के बाहर सबसे अधिक यूएसएफडीए से मान्यता प्राप्त मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भारत में हैं, जो गुणवत्ता और सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय भरोसा दर्शाते हैं।
वैश्विक समझौतों से मिलेगा बढ़ावा
यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड के साथ प्रस्तावित और हालिया व्यापार समझौते इस सेक्टर को और गति देंगे। इससे नए बाजार खुलेंगे, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
API और वैक्सीन में भी भारत अग्रणी
देश में करीब 500 कंपनियां सक्रिय दवा कच्चा माल (API) का उत्पादन करती हैं, जो वैश्विक API बाजार का लगभग 8% हिस्सा है।
भारत वैक्सीन उत्पादन में भी अग्रणी है—
- यूनिसेफ को करीब 60% वैक्सीन सप्लाई
- DPT और BCG वैक्सीन की वैश्विक मांग का 40–70%
- विश्व स्वास्थ्य संगठन की खसरा वैक्सीन की 90% मांग पूरी
16 गुना बढ़ा दवा निर्यात
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का दवा निर्यात 30.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2000-01 के 1.9 अरब डॉलर के मुकाबले लगभग 16 गुना अधिक है।
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