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A big political gamble: दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से हटना: कांग्रेस की नई रणनीति या बड़ा सियासी दांव?

दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से

वरिष्ठ नेतृत्व को मैदान में उतारने और युवाओं को आगे बढ़ाने की तैयारी

A big political gamble: नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा नहीं जाने का ऐलान कर सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। अप्रैल में उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लेकिन उससे पहले ही इस घोषणा ने दिल्ली से भोपाल तक कांग्रेस में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।


व्यक्तिगत नहीं, रणनीतिक फैसला!

पार्टी सूत्रों के मुताबिक दिग्विजय सिंह का यह फैसला व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। राहुल गांधी के नए राजनीतिक रोडमैप के तहत अब पार्टी का फोकस सिर्फ संसद तक सीमित नहीं, बल्कि संगठन को जमीनी स्तर पर फिर से मजबूत करना है।

इसी रणनीति के तहत—

  • वरिष्ठ नेताओं को संगठनात्मक जिम्मेदारियां
  • युवा नेताओं को आगे लाने की तैयारी

की जा रही है।


दिग्विजय को फिर मिल सकती है बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी

सूत्रों का कहना है कि दिग्विजय सिंह को राज्यसभा से मुक्त कर एक बार फिर मध्य प्रदेश में बड़े संगठनात्मक मिशन की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
2017-18 की उनकी 3300 किलोमीटर लंबी नर्मदा परिक्रमा आज भी कांग्रेस के लिए मजबूत राजनीतिक प्रतीक मानी जाती है, जिसने 2018 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में जान फूंकी थी।

अब चर्चा है कि—

  • 2028 विधानसभा चुनाव से पहले
  • एक और नर्मदा परिक्रमा या
  • बड़ा जनसंपर्क अभियान

दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कराया जा सकता है।


दलित प्रतिनिधित्व की मांग भी तेज

दिग्विजय सिंह के फैसले के बाद कांग्रेस में सामाजिक संतुलन की बहस भी शुरू हो गई है।
अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने मांग की है कि इस बार राज्यसभा में दलित समाज को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। हालांकि दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि टिकट का फैसला उनके हाथ में नहीं है, लेकिन उन्होंने यह जरूर दोहराया कि वे अपनी सीट खाली कर रहे हैं।


कांग्रेस में राज्यसभा की दौड़, कई बड़े नाम मैदान में

दिग्विजय सिंह के हटने के बाद कांग्रेस की एकमात्र सुरक्षित राज्यसभा सीट अब सियासी मुकाबले का केंद्र बन गई है। प्रमुख दावेदारों में—

  • कमलनाथ – यदि दावेदारी की तो मुकाबला कठिन
  • जीतू पटवारी – प्रदेश अध्यक्ष, आक्रामक राजनीति
  • अरुण यादव – संगठन और दिल्ली दोनों में पकड़
  • अजय सिंह (राहुल भैया) – अनुभव और वरिष्ठता

शामिल बताए जा रहे हैं।


एमपी की राज्यसभा सीटों का गणित

  • कुल सीटें: 11
  • बीजेपी: 8 सीटें
  • कांग्रेस: 3 सीटें

2026 में तीन सीटें खाली हो रही हैं, लेकिन संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के लिए फिलहाल एक ही सीट सुरक्षित मानी जा रही है। ऐसे में दावेदारी की लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है।


बदलती कांग्रेस, बदलता नेतृत्व मॉडल

कुल मिलाकर दिग्विजय सिंह का राज्यसभा से हटना—

  • कांग्रेस की बदलती रणनीति,
  • पीढ़ीगत बदलाव,
  • और मध्य प्रदेश में संगठन को फिर से खड़ा करने की कोशिश

का संकेत माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस नेतृत्व इस सीट पर किसे मौका देता है और क्या यह फैसला पार्टी के भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।

साभार… 

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