गर्मी बढ़ी, लेकिन मटकों की बिक्री घटी; दुकानदारों की चिंता बढ़ी
A Major Challenge: बैतूल। जैसे ही गर्मी ने जोर पकड़ा, शहर में देसी फ्रिज यानी मिट्टी के मटकों की दुकानें फिर से सज गईं। लेकिन इस बार नजारा पहले जैसा नहीं है। बढ़ती गर्मी के बावजूद मटकों की बिक्री में भारी गिरावट देखी जा रही है, जिससे दुकानदार मायूस हैं।
कीमत बढ़ी, मांग घटी
पिछले कुछ वर्षों में मटकों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।
- छोटे मटके: ₹150 से शुरू
- बड़े और डिजाइनर मटके: ₹500 तक
बाजार में नल वाले मटके, सुराही, गोल मटके और पीओपी मटके उपलब्ध हैं, लेकिन ग्राहकों की संख्या कम होती जा रही है।
आरो पानी बना बड़ा कारण
मटकों की बिक्री में गिरावट का सबसे बड़ा कारण शहर में कैंपर के जरिए मिलने वाला आरओ (RO) पानी है।
- घर-घर सप्लाई
- तुरंत उपलब्ध
- साफ और फिल्टर पानी का भरोसा
इन सुविधाओं के चलते लोग अब पारंपरिक मटकों की बजाय RO पानी को प्राथमिकता देने लगे हैं।
मटके का पानी अब भी खास
इसके बावजूद कुछ लोग आज भी मटके का पानी पसंद करते हैं, क्योंकि:
- यह प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है
- इसमें कोई केमिकल नहीं होता
- स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहतर माना जाता है
दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ीं
शहर की मटका विक्रेता आशा प्रजापति, जो करीब 20 साल से इस व्यवसाय में हैं, बताती हैं:
“पहले रोज 30-40 मटके बिक जाते थे, अब मुश्किल से 10 ही बिकते हैं।”
उनके अनुसार, COVID-19 लॉकडाउन के बाद से ही बिक्री में गिरावट शुरू हो गई थी, जो अब और बढ़ गई है।
परंपरागत कारोबार पर खतरा
दुकानदारों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह पारंपरिक व्यवसाय खत्म होने की कगार पर पहुंच सकता है।
- आमदनी पर सीधा असर
- ग्राहकों की संख्या में लगातार कमी
- नई पीढ़ी का रुझान आधुनिक विकल्पों की ओर
- साभार…
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