Act: भोपाल। देशभर में लाल मुंह वाले बंदरों (Rhesus Macaque) के बढ़ते आतंक और मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए केंद्र सरकार अब इन्हें दोबारा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम की अनुसूची में शामिल करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने सभी राज्यों से सुझाव मांगे हैं।
2022 में किया गया था संरक्षण सूची से बाहर
वर्ष 2022 में केंद्र सरकार ने लाल मुंह वाले बंदरों की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण उन्हें ‘वन्यजीव’ की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इसके बाद वन विभाग के पास इन बंदरों को पकड़ने या प्रबंधन करने का कानूनी अधिकार नहीं रहा, जिससे कई शहरों और गांवों में इनका आतंक बढ़ गया। अब नागरिकों और प्रशासन से लगातार शिकायतें मिलने के बाद केंद्र ने नीति पुनर्विचार शुरू किया है।
राज्य ने दी सहमति
मध्यप्रदेश के मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक सुभरंजन सेन ने बताया —
“भारत सरकार ने लाल मुंह वाले बंदरों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची में शामिल करने के लिए राज्यों से सुझाव मांगे हैं। हमने राज्य की ओर से सहमति के साथ सुझाव भेज दिए हैं।”
विशेषज्ञों की राय
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सुदेश बाघमारे का कहना है कि लाल मुंह वाले बंदरों की समस्या का एक बड़ा कारण लोगों की गलत धार्मिक धारणा है।
“लोग आस्था के नाम पर इन बंदरों को भोजन डालते हैं, जबकि यह ‘हनुमान बंदर’ नहीं होते। इससे उनकी आदतें बदल रही हैं और वे मानव बस्तियों में आक्रामक होते जा रहे हैं।”
संभावित कदम
- लाल मुंह वाले बंदरों को वन्यजीव अधिनियम की अनुसूची में दोबारा शामिल किया जाएगा।
- इसके बाद वन विभाग को उन्हें पकड़ने और नियंत्रित करने का अधिकार मिलेगा।
- जनहानि और संपत्ति नुकसान की घटनाओं पर अंकुश लग सकेगा।
यह निर्णय न केवल मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने बल्कि वन्यजीव प्रबंधन नीति को संतुलित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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