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Chandra Grahan 2023 – पेनुमब्रल ग्रहण की नहीं होती है कोई धार्मिक मान्यता, इसमें सूतक का पालन नहीं करना होगा

आज रात को दिखेगा उपछाया चंद्र ग्रहण

Chandra Grahan 2023आज की रात पेनुमब्रल यानी उपछाया चंद्र ग्रहण हो रहा है। इस ग्रहण की धार्मिक मान्यता नहीं होती है, इस प्रकार के ग्रहण में सूतक के नियमों का पालन भी नहीं करना पड़ता है। आज वैशाख पूर्णिमा, बुद्ध जयंती है। पूर्णिमा से जुड़े धर्म – कर्म पूरे दिन किए जा सकेंगे। पेनुमब्रल चंद्र ग्रहण आज शाम 8.44 बजे से शुरू हो जाएगा और रात में 1.01 खत्म होगा। इस तरह ये ग्रहण 4 घंटे और 18 मिनट का रहेगा।

1. उपछाया चंद्रग्रहण- उपछाया, मांद्य यानी पेनुमब्रल ग्रहण में पृथ्वी की सीधी छाया पूरी तरह से चंद्र पर नहीं पड़ती है। चंद्र के आगे सिर्फ धूल जैसी छाया दिखाई देती है। इस ग्रहण का धार्मिक नहीं होता है। ये मात्र एक खगोलिय घटना है।

2. पूर्ण चंद्र ग्रहण- जब पृथ्वी की छाया से पूरे चंद्र पर पड़ती है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है। इस ग्रहण में चंद्र लाल दिखने लगता है।

3. आंशिक चंद्र ग्रहण- जब चंद्र के कुछ भाग पर पृथ्वी की छाया पड़ती है और कुछ भाग दिखाई देता है। तो इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहते है। पूर्ण और आंशिक चंद्र ग्रहण का धार्मिक महत्व होता है, इसिलए इनका सूतक भी रहता है।

धार्मिक मान्यता | Chandra Grahan 2023

पुराने समय में देवताओं ने दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। मंथन के अंत में अमृत निकला। देवताओं को अमृत देने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार लिया। मोहिनी देवताओं को पिला रही थी, उस समय राहु नाम का एक असुर भी देवताओं का वेश बनाकर वहां पहुंच गया। मोहिनी ने राहु को देवता समझकर उसे भी अमृत पिला दिया।

राहु शत्रुता के कारण सूर्य और चंद्र को निगल लेने के कारण : सूर्य और चंद्र देवताओं के बीच बैठे राहु को पहचान गए थे। उन्होंने ये बात विष्णु जी को बता दी। विष्णु जी ने तुरंत ही सुदर्शन चक्र से राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। राहु अमृत पी चुका था, इस कारण उसे मृत्यु नहीं हुई, लेकिन उसके दो हिस्से हो गए। सिर को राहु और धड़ को केतु के नाम से जाना जाता है। सूर्य और चंद्र ने उसका राज विष्णु जी को बताया था, इस कारण वह इन दोनों को शत्रु मानता है। राहु शत्रुता के कारण सूर्य और चंद्र को समय – समय पर ग्रसता है यानी निगल लेता है। इसे ही ग्रहण कहा जाता है।

चंद्र की छाया पृथ्वी पर पड़ने से ग्रहण होता है : विज्ञान के मुताबिक, जब जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्र एक सीधी लाइन में आ जाते हैं और चंद्र पर पृथ्वी की छाया पड़ने लगती है तो चंद्र ग्रहण होता है। जब सूर्य, चंद्र और पृथ्वी एक सीधी लाइन आ जाते हैं और चंद्र की छाया पृथ्वी पर पड़ती है तो इस स्थिति को सूर्य ग्रहण कहते हैं।

वैशाख पूर्णिमा पर राशि अनुसार कौन – कौन से शुभ काम किए जा सकते हैं | Chandra Grahan 2023

मेष : घर के आसपास जरूरतमंद लोगों को दूध या खीर बांटें।
वृष: दही और गाय का घी छोटे बच्चों को दान करें।
मिथुन: घर के आसपास किसी मंदिर में छायादार वृक्ष का पौधा लगाएं।
कर्क : जल का दान करें। किसी प्याऊ में पानी से भरा मटका दान कर सकते हैं।
सिंह : गुड़ का दान करें।
कन्या : घर के आसपास छोटी कन्याओं को पढ़ाई से जुड़ी चीजें जैसे कॉपी, पेन आदि दान करें।
तुला : दूध, चावल और शुद्ध घी का दान करें।
वृश्चिक : लाल मसूर की दाल का दान करें।
धनु : चने की दाल पीले कपड़े में बांधकर दान करें।
मकर और कुंभ : काले तिलए तेलए जूते -चप्पल, छाता और नीले कपड़ों का दान करें।
मीन : रोगियों को फल और दवाओं का दान करें।
वैशाख पूर्णिमा पर कर सकते हैं ये शुभ काम भी
5 मई को हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

इस ग्रहण में ये काम करें : भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित भरें और भगवान का अभिषेक करें। भगवान को पीले चमकीले वस्त्र अर्पित करें। ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। शिवलिंग के पास दीपक जलाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। देवी पार्वती को सुहाग का सामान जैसे चूड़ी, लाल साड़ी, कुमकुम आदि चीजें अर्पित करें। शक्रवार को शुक्र ग्रह के लिए दूध का दान करें। शुक्र की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए चांदी के लोटे से शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं।

Source – Internet

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