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Board dissolved: जातियों को साधने सामाजिक बोर्ड बनाए, पर बजट तक नहीं दिया

जातियों को साधने सामाजिक बोर्ड

दो साल निष्क्रिय रहने के बाद सितंबर में सरकार ने सभी बोर्ड भंग किए

Board dissolved: भोपाल: 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. शिवराज सिंह चौहान ने विभिन्न जातियों को साधने के उद्देश्य से कई सामाजिक बोर्डों का गठन किया था। इन बोर्डों के अध्यक्षों को मंत्री का दर्जा भी दिया गया था। चुनाव में इन जातियों के नेताओं ने भाजपा को लाभ दिलाया, लेकिन सरकार बनने के बाद दो वर्षों तक इन बोर्डों को बजट तक नहीं दिया गया। सितंबर 2025 में बिना समीक्षा किए सभी बोर्ड भंग कर दिए गए।

9 समाज बोर्ड, दो साल में एक भी रुपया नहीं खर्च

कौशल विकास विभाग के अधीन बनाए गए 9 समाज कल्याण बोर्डों को दो वर्षों में एक रुपया भी नहीं दिया गया। कुल 8.34 करोड़ रुपए आवंटित होने के बावजूद कोई राशि जारी नहीं हुई। नतीजतन, किसी भी समाज का एक भी हितग्राही लाभान्वित नहीं हुआ।
यह जानकारी तकनीकी शिक्षा राज्य मंत्री गौतम टेटवाल ने विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न क्रमांक 111 के जवाब में दी। सरकार ने इन बोर्डों का गठन अक्टूबर 2023 में किया था और 17 सितंबर 2025 को बिना किसी मूल्यांकन के सभी बोर्ड भंग कर दिए।

बैठकों का हाल: केवल नाममात्र की कार्यवाही

मंत्री टेटवाल के अनुसार जिला स्तर पर किसी भी बोर्ड की एक भी बैठक नहीं हुई।

  • तीन बोर्डों ने 9 सितंबर 2024 को बैठक की
  • तीन ने फरवरी–मार्च 2025 में
  • तीन बोर्डों ने केवल 2025 में बैठक की
  • वहीं तीन बोर्डों ने एक भी बैठक नहीं की

ग्रेवाल का आरोप: समाजों को गुमराह किया गया

विधायक प्रताप ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि इन बोर्डों का गठन चुनावी लाभ के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि भाजपा पदाधिकारियों को अध्यक्ष/सदस्य बनाकर वाहन, मानदेय, गृह-भत्ता और दूरभाष सुविधाएं दी गईं, लेकिन बोर्ड के काम के नाम पर एक भी योजना नहीं बनी।
उन्होंने कहा कि—

  • युवाओं और बेरोजगारों के लिए कोई योजना नहीं बनी
  • कोई रणनीति, प्रशिक्षण या चयन प्रक्रिया लागू नहीं हुई
  • समाजों के हित में एक रुपया तक खर्च नहीं किया गया

ग्रेवाल ने यह भी कहा कि 2023 के चुनावी वर्ष में कुल 15 समाज बोर्ड बनाए गए थे, जिनमें से 9 कौशल विकास विभाग के अधीन रखे गए थे।

कई बोर्डों में नियुक्तियां तक पूरी नहीं हुईं

  • महाराणा प्रताप बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति तक नहीं हुई, और बाद में बोर्ड भंग कर दिया गया।
  • तेलघानी और जय मीनेष बोर्ड में सदस्यों की नियुक्तियां नहीं की गईं।
  • रजक समाज और वीर तेजाजी बोर्ड में निर्धारित चार सदस्यों की जगह केवल एक–एक सदस्य नियुक्त किया गया।

आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति भी गठन के डेढ़ साल बाद नवंबर 2024 में हुई और अप्रैल–अगस्त 2025 के बीच उन्हें भी हटा दिया गया।

साभार… 

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