Tuesday , 3 February 2026
Home Uncategorized Book: 500 साल पुरानी किताब में गंजेपन और बीमारियों के अजीब इलाज, वैज्ञानिक भी हैरान
Uncategorized

Book: 500 साल पुरानी किताब में गंजेपन और बीमारियों के अजीब इलाज, वैज्ञानिक भी हैरान

500 साल पुरानी किताब में गंजेपन और

Book: मैनचेस्टर। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के वैज्ञानिकों को यूरोप के पुनर्जागरण काल की करीब 1531 की एक दुर्लभ किताब मिली है, जिसमें उस दौर के आम लोगों की बीमारियों और उनके इलाज का अनोखा ब्यौरा दर्ज है। यह किताब जॉन रायलैंड्स लाइब्रेरी में सुरक्षित रखी गई थी और इसे नेत्र चिकित्सक बार्थोलोमाउस वोग्थेर ने लिखा था।

किताब में बताया गया है कि उस समय डॉक्टर और वैद्य बीमारियों के इलाज के लिए प्राकृतिक चीजों पर ज्यादा भरोसा करते थे। दिल से जुड़ी समस्याओं के लिए अगर की लकड़ी को उपयोगी माना जाता था, जिसे दिल को साफ करने और धड़कन को सामान्य रखने में मददगार समझा जाता था।

सिरदर्द से गंजेपन तक, अजीब नुस्खे

सिरदर्द जैसी आम समस्या के लिए भी आज के लिहाज से अजीब सलाहें दर्ज हैं। लोगों को तंबाकू के पाइप में दालचीनी डालकर पीने की सलाह दी जाती थी। लेकिन सबसे चौंकाने वाले उपाय गंजेपन और बालों की मजबूती से जुड़े हैं।

किताब के मुताबिक, उस दौर में बाल झड़ना एक बीमारी माना जाता था और इसे ठीक करने के लिए लोगों को सिर पर इंसानी मल लगाने की सलाह दी जाती थी। यह विश्वास था कि इससे सिर की बीमारी दूर होगी और बाल दोबारा उगने लगेंगे।
इतना ही नहीं, घने और मजबूत बालों के लिए छिपकली के सिरों को पीसकर बने मिश्रण को सिर पर लगाने का भी जिक्र मिलता है।

मुंह के छालों के लिए दरियाई घोड़े के दांत

किताब में मुंह के छालों के इलाज के लिए भी हैरान कर देने वाले तरीके दर्ज हैं। उस समय हिप्पोपोटेमस (दरियाई घोड़े) के दांतों को मुंह के छालों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता था।

कई हाथों की लिखावट, कई अनुभव

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस किताब में अलग-अलग तरह की हैंडराइटिंग मिलती है, जिससे लगता है कि इसमें कई लोगों ने अपने अनुभव और नुस्खे जोड़े होंगे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इन उपायों को लिखने वाले चिकित्सकों ने खुद इन्हें अपनाया भी था या नहीं। राहत की बात यह है कि किताब में दर्ज सभी उपचार नुकसानदेह नहीं थे, लेकिन कई उपाय आज के नजरिए से बेहद अजीब और अविश्वसनीय लगते हैं।

तब और अब का फर्क

आज के दौर में विग, हेयर ट्रांसप्लांट और आधुनिक इलाज उपलब्ध हैं, लेकिन 15वीं–16वीं सदी में आधुनिक चिकित्सा के अभाव में लोग गंजेपन और बीमारियों से बचने के लिए ऐसे देसी और विचित्र उपायों पर निर्भर रहते थे। यही वजह है कि यह किताब आज के वैज्ञानिकों और इतिहासकारों के लिए चिकित्सा इतिहास की एक अनोखी झलक पेश करती है।

साभार….

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Arrest: दामजीपुरा आगजनी मामले में दो की गिरफ्तारी

तनाव को लेकर एसपी ने किया रात्रि विश्रामआईजी-डीआईजी भी पहुंचे थे दामजीपुरा...

Alert: बदलेगा मौसम, 2–3 फरवरी को बारिश और बर्फबारी का अलर्ट

दो सक्रिय पश्चिमी विक्षोभों से तापमान गिरेगा, कई राज्यों में आंधी-तूफान और...

Alliance: मालेगांव में ‘असंभव’ गठबंधन: BJP–कांग्रेस ने मिलकर बनाई ‘भारत विकास आघाड़ी’

मेयर चुनाव से पहले बदले सत्ता के समीकरण, 5 पार्षद बनेंगे किंगमेकर...

Lunar eclipse: 3 मार्च को होलिका दहन पर लगेगा साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण

भारत में दिखेगा पूर्ण ग्रहण, सुबह से लागू रहेगा सूतक काल Lunar...