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Brave warrior: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राधा किशन सिंह का निधन

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राधा किशन

ब्रिटिश सरकार से देश से आजाद कराने निभाई थी भूमिका

Brave warrior: सारनी। नेता जी सुभाष चन्द्र बोस की अगुवाई में ब्रिटिश सरकार से आजादी की जंग लडऩे वाले आजाद हिंद फौज के सिपाही जांबाज योद्धा राधा किशन सिंह हमारे बीच नही रहे। 105 साल की उम्र में उन्होंने आज सुबह 10.30 बजे अंतिम सांस ली। 01 जनवरी 1920 को राधा किशन सिंह का जन्म बर्मा देश के पेंगु जिले के चौदगा गांव में हुआ था। उनके माता पिता बिहारी मूल के थे तथा 6 माह भारत मे तो 6 माह बर्मा में रहते थे। बिहार मूल के ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हरि सिंह का उनके परिवार में काफी आना जाना था। 4 जुलाई 1943 को सिंगापुर में अपने जमाने के प्रसिद्ध क्रांतिकारी रास बिहारी बोस ने जब आजाद हिंद फौज की स्थापना की तो सबसे पहले इसमें जापान में बंदी बनाए गए भारतीय बंदियों को शामिल किया गया।
बाद में काफी संख्या में बर्मा और सिंगापुर के भारतीय स्वयंसेवक भी रासबिहारी की प्रेरणा से आजाद हिंद में भर्ती हुए। उनमे से एक थे 23 वर्षीय युवा राधा किशन सिंह बाद में आजाद हिंद फौज की कमान नेता जी सुभाष चन्द्र बोस ने सम्हाल ली। नेता जी की अगुआई में इम्फाल और कोहिमा के मोर्चे पर कई बार ब्रिटिश हुकूमत को शिकस्त देंने वाले राधा किशन सिंह 3 महीने के लिए जेल भी गये और भोला भाई देशाई के प्रयासों से रिहा हुए। आजाद हिंद फौज में रहते हुए राधा किशन सिंह ने रंगून के पास कंटोमेन्ट एरिया में चनमारी ( एक प्रकार की मिलिट्री ट्रेनिंग)पास की और आजाद हिंद के जांबाज सिपाही के रूप में ब्रिटिश हुकूमत से आजादी पर्यंत लड़ते रहे।


जर्मनी और इटली के हार के बाद द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त हो गया। उसी समय अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम गिरा दिया जिसमें लाखों जापानी मारे गये। जापान ने आत्म समर्पण कर दिया और नेता जी सुभाष चन्द्र बोस को पीछे हटना पड़ा। अंतिम बार बर्मा छोडऩे से पहले नेता जी ने जिन फौजियों से हाँथ मिलाया उनमे राधा किशन सिंह भी थे। देश की आजादी के बाद दो दशक तक बर्मा में अनेक दुश्वारियों को झेलने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री मंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रेरणा से वे शरणार्थी बनकर भारत आ गए। मध्यप्रदेश के बैतुल जिले के पहाड़पुर गावँ में गुजर बसर करने के लिए उन्हें 5 एकड़ जमीन दी गई। उसी समय पाथाखेड़ा की कोयला खदानों में मजदूरों की भर्ती हो रही थी।
राधा किशन सिंह भी जनरल मजदूर के रूप में भर्ती हो गए और दो दशक से अधिक समय तक अपनी सेवाएं देने के बाद 90 के दशक में सेवा निवृत्त हो गए। पिछले दिनों आजाद हिंद फौज के गठन के 75वी वर्षगांठ पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें दिल्ली में सम्मानित किया।अपनी जवानी को आजादी की लड़ाई में खपाने वाले राधाकिशन सिंह अपनी उम्र के आखरी पड़ाव में भी सक्रिय रहे।आजाद हिंद के फौजी की वर्दी की डिजाइन में सिला हुआ सफेद पैंट शर्ट उनका प्रिय पहनवा था। जयहिंद बोलकर लोगो का अभिवादन करते रहे।अपने उम्र की शतकीय पारी खेल चुके राधा किशन सिंह न सिर्फ बैतुल अंचल बल्कि पूरे राष्ट की धरोहर थे। उनके निधन के बाद मध्य भारत मे नेता जी सुभाषचंद्र बोस की आखिरी निशानी भी खत्म हो गई। आजादी के इस जाबांज योद्धा को अंतिम प्रणाम।

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