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Breaker: मैं कहीं भी ब्रेकर लगवाऊं मेरी मर्जी

मैं कहीं भी ब्रेकर

अनुमति और फाइल की भी नहीं पड़ रही जरूरत
दबाव डलवाकर करवा लेते हैं नपा से भुगतान

भाग-4
Breaker: बैतूल। मैं चाहू ये करू, मैं चाहू वो करू मेरी मरजी… इसी तर्ज पर लम्बे समय से नगरपालिका में फर्जी कार्य और भुगतान का खेल चल रहा है। नगर पालिका परिषद बैतूल के अधिकारों की धज्जियां उड़ाते हुए कुछ व्यवसायी टाईप के पार्षद अपना उल्लू सीधा करने के लिए बगैर अनुमति वार्ड में विकास के नाम पर कार्य करवा रहे हैं और बाद में ऐन-केन-प्रकारेण नगर पालिका के कर्मचारियों पर दबाव डालकर फाइन बनवा कर भुगतान करवा लेते हैं। 1 लाख के अंदर के कार्य के नाम पर ना तो टैंडर होता है और ना ही परिषद की अनुमति लगती है। इसी का फायदा उठाकर लंबे समय से ये खेल परिषद में चल रहे हैं। अब कुछ दिनों से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर लगाने की होड़ मची है जिसके लिए ना तो परिषद की अनुमति और ना ही अधिकारियों की स्वीकृति ली जा रही है।


टैगोर वार्ड के बाद गणेश वार्ड में लगे ब्रेकर्स


शहर में बिना अनुमति स्पीड ब्रेकर लगाए जाने के खेल में गंज क्षेत्र के टैगोर वार्ड के बाद अब गंज क्षेत्र के ही सिविल लाइन्स में गणेश वार्ड में एक ही सड़क पर थोड़ी-थोड़ी दूरी पर प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर ठोंक दिए गए हैं। ये स्पीड ब्रेकर कुछ दिनों बाद गाड़ियों के ब्रेक लगने से उखड़ जाते हैं और फिर कबाड़ी इन्हें ले जाकर बेच देते हैं। गणेश वार्ड में लगाए गए ब्रेकर्स में भी ना तो अधिकारी और ना ही नगर पालिका के परिषद की अनुमति है। इस बारे में जब नगर पालिका अध्यक्ष से बात करो तो उनका रटा-रटाया जवाब होता है कि मैं दिखवाती हूं, मैं बात करती हूं।


गंज कालेज रोड पर बने सीमेंट के ब्रेकर


कुछ दिनों पहले गंज में कन्या शाला और जेएच कालेज के सामने सीमेंट के स्पीड ब्रेकर बनाए गए जिनके लिए ना तो उचित डिजाइन और सही ऊंचाई का पालन किया गया और ना ही मार्किंग और चेतावनी बोर्ड लगाए गए। जबकि नियम है कि स्पीड ब्रेकर पर सफेद या पीले रंग की मार्किंग होना चाहिए। स्पीड ब्रेकर के पहले चेतावनी बोर्ड होना चाहिए और 75-100 मिमी. की ऊंचाई और सही डिजाइन होना चाहिए।


दबाव डालकर करवा लेते हैं पेमेंट


नगर पालिका में यह चर्चा आम हो गई है कि नपा के कुछ पार्षद इस तरह से अवैध रूप से और बगैर नपा की अनुमति के हर तरह के कार्य करवा ले रहे हैं जिसमें उनका व्यक्तिगत स्वार्थ जुड़ा रहता है और बाद में राजनैतिक दबाव डलवाकर पुरानी तारीख में फाइल तैयार करवाकर भुगतान करवा लेते हैं। ऐसा लंबे समय से चला आ रहा है। तत्कालीन सीएमओ और अध्यक्ष की ऐसी क्या मजबूरी थी कि जो उन्हें ऐसे फर्जी कामों का भुगतान करना पड़ता है।


भारत में हर दिन होती 50 दुर्घटनाएं


जानकारी के अनुसार भारत में स्पीड ब्रेकर्स के कारण हर दिन लगभग 30 से 50 दुर्घटनाएं होती हैं जिनमें औसतन 9 लोगों की जान जाती है। गलत या बिना मार्किंग वाले स्पीड ब्रेकर के कारण प्रतिवर्ष 10 हजार से अधिक लोगों की मौतें होती हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2015 में ही 11 हजार 84 लोगों ने इन जानलेवा स्पीड ब्रेकर की वजह से जान गंवाई है। इनमें सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और कर्नाटक में हादसे होते हैं। इन दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण अवैध, अव्यवस्थित और बिना रिफ्लेक्टिव पेंट/चेतावनी बोर्ड वाले स्पीड ब्रेकरों से हुई है।

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