Bribery scandal: लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सचिवालय में तैनाती के नाम पर घूसखोरी का बड़ा मामला सामने आया है। सचिवालय में तैनात 30 से ज्यादा अनुभाग अधिकारियों (SO) पर आरोप है कि उन्होंने घूस देकर मनचाही और ‘मलाईदार’ पोस्टिंग हासिल की। मामले को गंभीर मानते हुए सचिवालय प्रशासन विभाग ने सभी आरोपित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
सूत्रों के मुताबिक, बीते कई महीनों से सचिवालय में यह चर्चा चल रही थी कि ट्रांसफर पॉलिसी को दरकिनार कर कुछ अधिकारियों को बार-बार अहम विभागों में तैनात किया जा रहा है। शासन की ट्रांसफर नीति के अनुसार सचिवालय के विभागों को A, B और C श्रेणी में बांटा गया है और कर्मचारियों को चक्रानुक्रम (रोटेशन) के आधार पर तैनाती दी जानी थी।
लेकिन आरोप है कि कुछ अनुभाग अधिकारियों को लगातार ‘A’ श्रेणी के विभागों में ही पोस्टिंग दी जाती रही, जिसके पीछे घूस के लेन-देन की बात सामने आ रही है।
शिकायत के बाद शुरू हुई आधिकारिक जांच
सूत्र बताते हैं कि अनुभाग अधिकारियों की पोस्टिंग में घूसखोरी की शिकायत उच्च स्तर पर शासन तक पहुंची थी। इसी शिकायत के आधार पर सचिवालय प्रशासन विभाग को जांच के निर्देश दिए गए और अब सभी आरोपित अधिकारियों से लिखित जवाब मांगा गया है।
सचिवालय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव मनीष चौहान ने कहा—
“कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं। सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा गया है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”
विजिलेंस जांच की मांग
नोटिस जारी होने के बाद सचिवालय का माहौल गर्म हो गया है। कर्मचारी संगठनों और अधिकारियों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि इतने गंभीर मामले को सिर्फ नोटिस और जवाब तक सीमित न रखा जाए।
कई कर्मचारी नेताओं ने मांग की है कि विजिलेंस या किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
सचिवालय के एक समीक्षा अधिकारी ने कहा—
“अगर पोस्टिंग के लिए घूस ली जा रही है तो यह शासन की पारदर्शिता पर सीधा सवाल है। ट्रांसफर नीति के उल्लंघन और घूसखोरी दोनों की व्यापक जांच होनी चाहिए।”
फिलहाल सभी की नजरें अनुभाग अधिकारियों के जवाबों पर टिकी हैं, जिनके आधार पर यह तय होगा कि मामला सिर्फ प्रशासनिक अनियमितता तक सीमित रहेगा या फिर यह बड़े घोटाले का रूप लेगा।
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