Business: डिंडौरी। आदिवासी बहुल जिला डिंडौरी में एंटीबायोटिक दवाओं का अंधाधुंध और गलत इस्तेमाल अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। जागरूकता की कमी, झोलाछाप डॉक्टरों की मनमानी और मेडिकल स्टोरों की लापरवाही ने जिले में एंटीबायोटिक दवाओं का करीब ₹5 करोड़ का बाजार खड़ा कर दिया है। इसका नतीजा यह है कि मरीज न सिर्फ महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं, बल्कि गलत इलाज से उनकी बीमारी और बिगड़ भी रही है।
बिना जरूरत भी दी जा रहीं हैवी एंटीबायोटिक
जानकारी के मुताबिक—
- महानगरों से आने वाले फार्मा कंपनी के एमआर डॉक्टरों को ज्यादा कमीशन और प्रलोभन देकर
- अपनी महंगी एंटीबायोटिक लिखवाने का दबाव बना रहे हैं
कई डॉक्टर और झोलाछाप,
सामान्य बुखार और मामूली संक्रमण में भी भारी डोज की एंटीबायोटिक लिख रहे हैं।
बिना पर्ची बिक रही दवाएं
जिला मुख्यालय समेत
बजाग, करंजिया, समनापुर, अमरपुर, मेहंदवानी, शहपुरा, गाड़ासरई, गोरखपुर, विक्रमपुर, शाहपुर, कठौतिया और ग्रामीण इलाकों में
कई मेडिकल स्टोर बिना डॉक्टर के पर्चे के एंटीबायोटिक बेच रहे हैं।
डॉक्टरों की चेतावनी
डॉ. सुनील जैन, वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ
“एंटीबायोटिक का अधिक सेवन किडनी खराब कर सकता है। शरीर के अच्छे बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं और दूसरी दवाएं भी असर करना बंद कर देती हैं। नई एंटीबायोटिक महंगी होती हैं और उनमें जल्दी रेजिस्टेंस बन जाता है।”
डॉ. देवेंद्र मरकाम (पूर्व लोक सेवा आयोग सदस्य)
“जिले में एंटीबायोटिक का दुरुपयोग हो रहा है। यह न सिर्फ महंगी है बल्कि स्वास्थ्य के लिए खतरनाक भी है। बिना पर्चे बिकने वाली दवाओं पर सख्त रोक जरूरी है।”
स्वास्थ्य विभाग की सख्त चेतावनी
डॉ. मनोज पांडे, CMHO डिंडौरी
“बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेना स्वास्थ्य के लिए घातक है। मेडिकल स्टोरों और झोलाछापों की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। जो निजी डॉक्टर मनमानी से हैवी एंटीबायोटिक लिख रहे हैं, उन पर भी सख्त कदम उठेंगे।”
क्या है सबसे बड़ा खतरा?
एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल
👉 शरीर को रेजिस्टेंट बना देता है
👉 भविष्य में दवाएं असर करना बंद कर देती हैं
👉 साधारण संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है
साभार….
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