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Complaint: कांग्रेस जिलाध्यक्षों की शिकायत — पुराने नेता नहीं दे रहे काम करने का मौका

कांग्रेस जिलाध्यक्षों की शिकायत —

राहुल गांधी से करेंगे चर्चा

Complaint: पचमढ़ी/भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त 71 जिलाध्यक्षों के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में संगठनात्मक चिंतन के दौरान बड़ा मुद्दा सामने आया है। जिलाध्यक्षों ने बताया कि उनके-अपने जिलों में स्थापित और बार-बार चुनाव हार चुके पुराने नेता संगठन में दखल दे रहे हैं, जिससे नए जिलाध्यक्षों को स्वतंत्र रूप से काम करने में मुश्किल हो रही है।

सूत्रों के मुताबिक, शिविर में कई जिलाध्यक्षों ने कहा कि वे अपने जिलों में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन प्रभावशाली स्थानीय नेताओं के हस्तक्षेप से संगठनात्मक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इन नेताओं के पास अभी भी कार्यकर्ताओं और ब्लॉक स्तर तक का मजबूत नेटवर्क है, जिसकी वजह से वे नए जिलाध्यक्षों के निर्णयों को खुलकर समर्थन नहीं दे रहे।


🔹 राहुल गांधी से रखेंगे मुद्दा

इस संबंध में जिलाध्यक्षों ने सामूहिक रूप से तय किया है कि वे राहुल गांधी से सीधी चर्चा कर यह मामला उठाएंगे। राहुल गांधी शनिवार को पचमढ़ी पहुंचकर कांग्रेस जिलाध्यक्षों के इस प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करेंगे।
शिविर में यह भी तय किया गया है कि राहुल गांधी को बताया जाएगा कि नव नियुक्त जिलाध्यक्षों को जिले में किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और संगठन सृजन अभियान को प्रभावी बनाने के लिए क्या सुधार जरूरी हैं।


🔹 ‘नव सृजन अभियान’ से बने नए अध्यक्ष

मध्यप्रदेश कांग्रेस ने हाल ही में ‘नव सृजन अभियान’ के तहत जिलों में नए अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। राहुल गांधी ने इन्हें कांग्रेस संगठन की “नई ताकत” बताया था और कहा था कि आने वाले चुनावों में उम्मीदवार चयन में जिलाध्यक्षों की राय को प्राथमिकता दी जाएगी।


🔹 राहुल गांधी से साझा करेंगे रिपोर्ट और अनुभव

शिविर में भाग ले रहे जिलाध्यक्षों ने राहुल गांधी की बैठक से पहले एक संगठनात्मक रिपोर्ट तैयार की है।
इसमें वे बताएंगे कि 6 दिन के प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने क्या सीखा, संगठन सुदृढ़ीकरण के लिए क्या योजनाएं बनाई हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
राहुल गांधी के साथ सवाल-जवाब सत्र भी रखा गया है, जिसमें जिलाध्यक्ष अपने अनुभव, सुझाव और स्थानीय राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।


कुल मिलाकर, कांग्रेस के इस शिविर ने एक अहम आंतरिक चुनौती को उजागर कर दिया है — पुराने और नए नेतृत्व के बीच तालमेल का अभाव। अब देखना होगा कि राहुल गांधी इस मुद्दे पर जिलाध्यक्षों को क्या मार्गदर्शन देते हैं और संगठन में नई ऊर्जा लाने के लिए क्या दिशा तय करते हैं।

साभार… 

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