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Digital: मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की सभी प्रक्रियाएं डिजिटल

मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल

2025 में 6,500 से अधिक मामलों का निराकरण

डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम, फार्मासिस्टों को घर बैठे मिल रहा पंजीकरण प्रमाणपत्र

Digital: भोपाल | मध्य प्रदेश सरकार नागरिक सेवाओं को सरल, सहज और पारदर्शी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग कर रही है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल ने अपनी सभी प्रमुख प्रक्रियाओं का पूर्ण डिजिटलीकरण कर दिया है। दवा ट्रैकिंग, ऑनलाइन लाइसेंसिंग और ई-पूर्व सत्यापन जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से फार्मासिस्टों और अन्य स्टेकहोल्डर्स को सीधे लाभ मिल रहा है।


डिजिटल नवाचार से बढ़ी पारदर्शिता: उप मुख्यमंत्री

उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि फार्मेसी काउंसिल द्वारा किया गया यह डिजिटल नवाचार राज्य सरकार की डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक-केंद्रित सेवाओं की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि परिषद मैनुअल और विवेकाधीन व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए अब नियम-आधारित, स्वचालित और तकनीक-संचालित प्रणाली की ओर सफलतापूर्वक अग्रसर हुई है। फार्मासिस्ट पंजीकरण और नवीनीकरण प्रक्रियाओं का सरलीकरण युवाओं और पेशेवरों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध करा रहा है और साथ ही एक मजबूत व विश्वसनीय डेटाबेस के निर्माण में भी सहायक बन रहा है। उप मुख्यमंत्री ने इस प्रयास के लिए परिषद सदस्यों और अधिकारियों को बधाई दी।


2025 में 6,500 से अधिक प्रकरणों का हुआ निराकरण

मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष श्री संजय जैन ने बताया कि फार्मासिस्ट पंजीकरण, नवीनीकरण और फार्मेसी पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया गया है। ये सुधार फार्मेसी अधिनियम, 1948 और फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रावधानों के अनुरूप हैं।

उन्होंने बताया कि—

  • वर्ष 2023 में 2,889
  • वर्ष 2024 में 2,297
  • जनवरी–मई 2025 में 970
  • जून–दिसंबर 2025 में 5,536

प्रकरणों का निराकरण किया गया। वर्ष 2025 में कुल 6,500 से अधिक मामलों में कार्रवाई पूरी की गई। इसी अवधि में 8,000 से अधिक आवेदन प्रोसेस किए गए, जो पिछले वर्षों की तुलना में लगभग ढाई से तीन गुना अधिक है।


घर बैठे मिला पंजीकरण प्रमाणपत्र

डिजिटल एवं पूर्व-सत्यापन आधारित प्रणाली के चलते 2,199 अभ्यर्थियों को परिषद कार्यालय आए बिना ही घर बैठे पंजीकृत फार्मासिस्ट का प्रमाणपत्र जारी किया गया। शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन डिजिलॉकर से, पहचान का सत्यापन समग्र आईडी, डोमिसाइल और एफडीए लाइसेंस के एपीआई के माध्यम से स्वचालित रूप से किया जा रहा है। इससे अभ्यर्थियों के समय, यात्रा और आर्थिक खर्च में बड़ी बचत हुई है।


मैनुअल व्यवस्था से ऑनलाइन सिस्टम तक

पूर्व में पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह कागज़-आधारित थी, जिसमें दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन और डाक के माध्यम से शैक्षणिक पुष्टि की जाती थी। इससे प्रकरण लंबे समय तक लंबित रहते थे और डेटा असंगति जैसी समस्याएं सामने आती थीं। वर्तमान में पंजीकरण, नवीनीकरण और सुधार के लिए पूर्णतः ऑनलाइन और मानकीकृत मॉड्यूल लागू किए गए हैं। नाम, पिता के नाम और जन्मतिथि में सुधार के लिए अलग से ऑनलाइन करेक्शन मॉड्यूल विकसित किया गया है, जिससे लीगेसी डेटा को शुद्ध और अद्यतन किया जा रहा है।


लंबित मामलों में कमी, जवाबदेही में बढ़ोतरी

इन डिजिटल सुधारों के परिणामस्वरूप लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है, डेटा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ी है तथा प्रशासनिक बोझ भी कम हुआ है। साथ ही एक मजबूत, सुरक्षित और भविष्य-उन्मुख डिजिटल डेटाबेस का निर्माण किया गया है।

साभार… 

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