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Election: मप्र भाजपा अध्यक्ष चुनाव का ऐलान 16 जून के बाद संभव

मप्र भाजपा अध्यक्ष चुनाव का ऐलान 16

पचमढ़ी प्रशिक्षण वर्ग के बाद मिल सकते हैं संकेत

Election: भोपाल | मध्यप्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पिछले पांच महीनों से जारी सस्पेंस अब जल्द खत्म हो सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, 16 जून के बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।

बूथ से जिला तक की प्रक्रिया पूर्ण

भाजपा ने जनवरी 2025 में ही प्रदेश के 60 संगठनात्मक जिलों में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति कर दी थी। इसके पहले बूथ, मंडल और जिला स्तर के चुनाव संपन्न हो चुके थे। तब उम्मीद थी कि फरवरी में प्रदेश अध्यक्ष का चयन कर लिया जाएगा, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव, पहलगाम आतंकी हमला और राष्ट्रीय संगठन की व्यस्तताओं के कारण यह प्रक्रिया टलती रही।

🏢 मुख्यालय में सन्नाटा, कार्यकर्ता हैं हताश

भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक गतिविधियां ठप सी हैं। कार्यकर्ता नई भूमिकाओं की तलाश में आते हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। सबकी निगाहें अब संगठन में नेतृत्व परिवर्तन की घोषणा पर टिकी हैं।

📍 पचमढ़ी शिविर के बाद हो सकता है एलान

भाजपा का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर 14 से 16 जून तक पचमढ़ी में आयोजित हो रहा है। इसका उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे और समापन सत्र में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की मौजूदगी तय मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इसी शिविर के बाद मध्यप्रदेश अध्यक्ष के चुनाव की तारीखों का एलान हो सकता है।

राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने भी हाल ही में कहा कि “तारीख अभी तय नहीं है, लेकिन सब कुछ समय पर होगा।”

👤 कौन हैं दावेदार?

भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं:

नामभूमिकासंभावित कारण
वी.डी. शर्मावर्तमान प्रदेश अध्यक्षकार्यकाल में मिली चुनावी सफलता
हेमंत खंडेलवालविधायक, बैतूलसंगठन से जुड़ाव और वरिष्ठता
नरोत्तम मिश्रापूर्व गृहमंत्रीप्रशासनिक अनुभव
सुमेर सिंह सोलंकीराज्यसभा सांसदसंगठनात्मक प्रभाव
फग्गन सिंह कुलस्तेसांसद, मंडलाआदिवासी समुदाय से संबंध
लाल सिंह आर्यवरिष्ठ नेताअनुसूचित जाति वर्ग का प्रतिनिधित्व

“प्रदेश अध्यक्ष का चयन केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति से भी जुड़ा हुआ है।”
— राजनीतिक विश्लेषक


🔎 नज़रें 16 जून के बाद पर टिकीं

अब देखना यह होगा कि पचमढ़ी शिविर के बाद पार्टी नेतृत्व किस नाम पर मुहर लगाता है। कार्यकर्ताओं को जहां नई ऊर्जा की प्रतीक्षा है, वहीं राजनीतिक विश्लेषक इसे भविष्य की चुनावी दिशा तय करने वाला फैसला मान रहे हैं।

साभार… 

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