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History: भारत का नया इतिहास: अंतरिक्ष में जैविक प्रयोग करेगा भारत

भारत का नया इतिहास: अंतरिक्ष में

मानव जीवन की संभावनाओं का होगा अध्ययन

History:नई दिल्ली – अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में कई मील के पत्थर पार कर चुके भारत ने अब एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारत, दुनिया में पहली बार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर मानव जीवन की स्थिरता के अध्ययन के लिए जैविक प्रयोग करने जा रहा है।

इस पहल की घोषणा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने की। उन्होंने इसे “दुनिया में अपनी तरह की पहली ऐतिहासिक पहल” करार दिया।


एक्सिओम-4 मिशन: भारत, अमेरिका, नासा और डीबीटी की संयुक्त पहल

यह मिशन ISRO, नासा और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की संयुक्त साझेदारी में चलाया जा रहा है, जिसके तहत भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

मिशन की प्रमुख बातें:

  • शुभांशु स्पेसएक्स के ड्रैगन यान से उड़ान भरेंगे।
  • 8 जून 2025 को भारतीय समयानुसार शाम 6:41 बजे फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा मिशन।
  • शुभांशु 14 दिन तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में रहेंगे
  • इस दौरान वे 7 प्रमुख जैविक प्रयोग करेंगे।

क्या होंगे प्रमुख प्रयोग?

  1. सूक्ष्म शैवाल पर माइक्रोग्रैविटी का प्रभाव:
    तीन खाद्य माइक्रोएल्गी प्रजातियों की वृद्धि और आनुवंशिक गतिविधियों का अध्ययन किया जाएगा।
  2. साइनोबैक्टीरिया का व्यवहार:
    यह देखा जाएगा कि स्पाइरुलिना और साइनोकोकस जैसे जीव अंतरिक्ष में यूरिया और नाइट्रेट आधारित पोषक माध्यमों के साथ कैसे प्रतिक्रिया करते हैं।
  3. पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों का परीक्षण:
    मेथी और मूंग जैसे खाद्य बीजों को अंकुरित कर उनकी वृद्धि का मूल्यांकन किया जाएगा – ताकि अंतरिक्ष में स्वदेशी खाद्य स्रोत विकसित किए जा सकें।
  4. अंतरिक्ष में मांसपेशियों पर प्रभाव:
    माइक्रोग्रैविटी में मांसपेशियों की कार्यप्रणाली और संरचना पर प्रभाव का परीक्षण।

भारत का गौरव: राकेश शर्मा के बाद अब शुभांशु शुक्ला

1984 में राकेश शर्मा सोवियत संघ के ‘सोयूज’ अंतरिक्ष यान से अंतरिक्ष गए थे और वे भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री बने। अब शुभांशु शुक्ला, आईएसएस की यात्रा करने वाले पहले भारतीय बनेंगे, जो भारत के अंतरिक्ष अभियान में एक नया अध्याय जोड़ेंगे।


महत्व और संभावनाएँ

इस मिशन के माध्यम से भारत:

  • अंतरिक्ष में स्वावलंबी जीवन समर्थन प्रणाली (Life Support Systems) के विकास की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
  • भविष्य में मानव उपनिवेशों या दीर्घकालीन स्पेस मिशनों की तैयारी कर रहा है।
  • भारतीय जैव प्रौद्योगिकी की क्षमताओं को वैश्विक मंच पर स्थापित कर रहा है।
  • साभार… 

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