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Malnutrition: कुपोषण से जंग जारी, फिर भी 33% बच्चे कम वजन के शिकार

कुपोषण से जंग जारी, फिर भी 33%

आंगनबाड़ियों में पूरक पोषण आहार की राशि 8 साल से स्थिर, विधानसभा में उठा मुद्दा

Malnutrition: मध्य प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ अभियान जारी है, लेकिन हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। प्रदेश में 33 प्रतिशत बच्चे कम वजन और 19 प्रतिशत बच्चे दुबलेपन (वेस्टिंग) की श्रेणी में हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों को दिए जाने वाले पूरक पोषण आहार की राशि पिछले आठ वर्षों से नहीं बढ़ाई गई है। सामान्य पोषण स्तर वाले बच्चों को प्रतिदिन 8 रुपये प्रति हितग्राही और अति गंभीर कुपोषित बच्चों को 12 रुपये प्रति हितग्राही की दर से आहार उपलब्ध कराया जा रहा है।


विधानसभा में गूंजा पोषण आहार की दर बढ़ाने का मुद्दा

पूरक पोषण आहार की दर का निर्धारण भारत सरकार द्वारा किया जाता है। अंतिम बार वर्ष 2017 में इसकी दर में वृद्धि की गई थी। यह जानकारी चुरहट से कांग्रेस विधायक अजय सिंह के प्रश्न के लिखित जवाब में सरकार ने दी। अजय सिंह ने पूछा था कि प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और उन्हें कुपोषण से बचाने के लिए पिछले दस वर्षों से राशि में कोई वृद्धि क्यों नहीं की गई? क्या सरकार इस राशि को कम से कम दोगुना करने पर विचार करेगी?


सरकार का जवाब: बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं

प्रश्न के उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि पूरक पोषण आहार की दर का निर्धारण भारत सरकार द्वारा किया जाता है और राज्य सरकार स्तर पर राशि बढ़ाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।


कुपोषण का स्तर अब भी चिंताजनक

कांग्रेस नेता हेमंत कटारे द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-5 (NFHS-5) के आंकड़े प्रस्तुत किए।

आंकड़ों के अनुसार:

  • 35.7% बच्चे ठिगनापन (स्टंटिंग) से ग्रस्त
  • 33% बच्चे कम वजन की श्रेणी में
  • 19% बच्चे दुबलेपन (वेस्टिंग) से प्रभावित

हालांकि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 की तुलना में स्थिति में कुछ सुधार दर्ज हुआ है। ठिगनापन में 1.6 प्रतिशत, कम वजन में 2.3 प्रतिशत और दुबलेपन में 2.6 प्रतिशत की कमी आई है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती महंगाई के बीच पूरक पोषण आहार की राशि में वृद्धि न होना कुपोषण से लड़ाई को प्रभावित कर सकता है।

साभार…

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