AIIMS Bhopal में एआई बताएगा मरीजों को रास्ता
Navigation: भोपाल एम्स अब देश का पहला ऐसा अस्पताल बनने जा रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल परिसर में सही विभाग तक पहुंचने का डिजिटल मार्गदर्शन मिलेगा। रोजाना 10 हजार से अधिक लोग इलाज, जांच और परामर्श के लिए यहां पहुंचते हैं। विशाल परिसर और एक जैसी दिखने वाली इमारतों के कारण अक्सर लोग भटक जाते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए यह स्मार्ट नेविगेशन सिस्टम तैयार किया जा रहा है। डिप्टी डायरेक्टर डॉ. संदेश जैन के अनुसार, क्यूआर कोड स्कैन करते ही मरीज को यह जानकारी मिल जाएगी कि कार्डियोलॉजी, अमृत फार्मेसी, न्यूरो सर्जरी, पैथोलॉजी, एमआरआई या संबंधित डॉक्टर का कक्ष किस दिशा में है।
आईआईटी इंदौर की टीम के साथ मिलकर तैयार हो रहा सिस्टम
इस प्रोजेक्ट को IIT Indore की दृष्टि टीम और भोपाल के एक स्टार्टअप के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। यह एआई आधारित प्रणाली गूगल मैप की तरह काम करेगी। एम्स के मोबाइल एप या परिसर में लगाए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद व्यक्ति अपने गंतव्य को सर्च करेगा। इसके बाद सिस्टम चरणबद्ध तरीके से सही रास्ता बताएगा।
दो तरीके से मिलेगा मार्गदर्शन
1. वेब आधारित प्रणाली
मुख्य प्रवेश द्वार और प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे। स्कैन करते ही मोबाइल पर इंटरैक्टिव मैप खुल जाएगा, जो विभाग तक पहुंचने का सटीक मार्ग बताएगा।
2. मोबाइल ऐप आधारित प्रणाली
यूजर मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सीधे नेविगेशन सुविधा का उपयोग कर सकेंगे।
- भवनों के बीच जीपीएस तकनीक का उपयोग होगा।
- भवनों के अंदर, जहां जीपीएस कमजोर पड़ता है, वहां हर 15 मीटर पर रिले सिस्टम लगाए जाएंगे।
- ये उपकरण मोबाइल को सटीक दिशा-निर्देशन देंगे, जिससे व्यक्ति बिना भटके सही स्थान तक पहुंच सकेगा।
एक माह का पायलट प्रोजेक्ट
इस स्मार्ट मार्गदर्शन प्रणाली को पहले एक माह के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। यदि परिणाम संतोषजनक रहे तो इसे पूरे परिसर में विस्तार दिया जाएगा। इससे मरीजों का समय बचेगा, भीड़ का दबाव कम होगा और स्टाफ पर बार-बार रास्ता बताने का अतिरिक्त बोझ भी घटेगा। भोपाल एम्स की यह पहल देश के अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।
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