New Excise Policy:भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार अगले कुछ दिनों में नई आबकारी नीति लागू करने जा रही है। इसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश की शराब दुकानों को छोटे–छोटे समूहों (2 से 5 दुकान) में बांटकर ठेके दिए जाएंगे और इन्हीं समूहों के आधार पर ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी। सरकार का दावा है कि इससे बड़े ठेकेदारों की मोनोपॉली टूटेगी, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और राजस्व में इजाफा होगा।
रेवेन्यू बढ़ाने पर सरकार का फोकस
आबकारी विभाग को 31 मार्च तक करीब 18 हजार करोड़ रुपये का राजस्व जुटाना है। अगले वित्तीय वर्ष में इसमें 15 से 20 फीसदी बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है। सरकार को उम्मीद है कि छोटे समूहों में ठेके देने से अधिक बोलीदाता सामने आएंगे और ऊंची बोली के जरिए अतिरिक्त आमदनी होगी।
नई नीति में ठेकों के आरक्षित मूल्य मौजूदा कीमत से 20% अधिक रखे जाएंगे।
पहले क्या था सिस्टम
- ज्यादातर जिलों में सिंगल टेंडर के जरिए ठेके दिए जाते थे।
- प्रदेश में करीब 3,500 शराब दुकानें हैं, जो लगभग 600 से ज्यादा समूहों में बंटी थीं।
- बड़े समूह होने से कुछ गिनी-चुनी कंपनियां ही टेंडर में हिस्सा ले पाती थीं।
- भोपाल में 87 दुकानों पर सिर्फ 4 कंपनियों का कब्जा था।
अब क्या बदलेगा
- दुकानों के 2 से 5 की संख्या में छोटे समूह बनाए जाएंगे।
- प्रदेश में करीब 1,000 नए समूह बनने की संभावना है।
- भोपाल में 25 से 30 समूह बनाए जा सकते हैं।
- ठेके ई-टेंडर और रेंडमाइजेशन सिस्टम से दिए जाएंगे।
- कौन-सा समूह पहले खुलेगा, यह कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ से तय होगा।
- नई दुकानें या अहाते नहीं खुलेंगे, मौजूदा ढांचे में ही ठेके दिए जाएंगे।
होटल-बार लाइसेंस में भी बदलाव
नई नीति में होटल-बार और रेस्टोरेंट-बार के लाइसेंस की शर्तों में ढील दी जाएगी।
संभावना है कि होटल-बार के लिए कमरों की न्यूनतम संख्या 20 से घटाकर 10 कर दी जाए।
भोपाल में बढ़ी शराब बिक्री
भोपाल में इस साल अब तक शराब से सरकार को करीब 1,015 करोड़ रुपये का राजस्व मिल चुका है।
पिछले साल जहां शराब बिक्री करीब 1,300 करोड़ रुपये थी, वहीं इस साल यह 1,800 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गई है।
- देशी शराब की खपत 61% घटकर 71.31 लाख से 27.63 लाख प्रूफ लीटर रह गई।
- विदेशी शराब की खपत 55% बढ़कर 45.07 लाख से 70.26 लाख प्रूफ लीटर पहुंच गई।
- बीयर की खपत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकार की उम्मीद
सरकार का मानना है कि सिंगल टेंडर की जगह मल्टी-ग्रुप मॉडल आने से न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि ओवरचार्जिंग की शिकायतें भी कम होंगी और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
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