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Objection: सोलर प्लांट को दी जमीन तो कहां जाएंगे वन्य प्राणी?

सोलर प्लांट को दी जमीन तो

वन विभाग ने पौधरोपण कर विकसित किया है जंगल

Objection: सारनी। जिले के सारनी क्षेत्र स्थित मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के राख बाँध पर प्रस्तावित सोलर प्लांट को लेकर उठी आपत्ति अब वन्यजीव संरक्षण की एक मजबूत मिसाल बनकर सामने आ रही है। जिस जमीन को औद्योगिक उपयोग के लिए पुन: मांगा जा रहा था, वहाँ आज खुलेआम वन्यजीवों की मौजूदगी देखी जा रही है। स्थानीय जानकारों और रिकॉर्ड के अनुसार राख बाँध क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी पहले से ही थी, जहाँ विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, छोटे स्तनधारी और अन्य जीव नियमित रूप से देखे जाते रहे हैं। पहले यह जमीन पहले पावर जनरेटिंग कंपनी के अधीन थी, परन्तु नवीन इकाई की स्थापना हेतु उक्त समय के नियमानुसार इस भूमि को वृक्षारोपण हेतु वन विभाग को वापस सौंप दिया गया था। बाद में वन विभाग द्वारा इस जमीन को संरक्षित करते हुए वृक्षारोपण कार्य किया गया, जिससे यह क्षेत्र और अधिक अनुकूल वन्यजीव आवास में परिवर्तित हुआ। अब पुन: इस जमीन को मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड वापस मंाग रही है। अगर ऐसा होता है तो वन्य प्राणी कहां जाएंगे यह बड़ा सवाल है।


सोलर प्लांट के लिए कंपनी वापस मांग रही जमीन


प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग द्वारा 106 हेक्टेयर राख बाँध क्षेत्र में चरणबद्ध रूप से लगभग 50,000 पौधों का रोपण वर्ष 2024-25 में किया गया, जिसकी जानकारी स्थल पर लगे विभागीय बोर्ड पर भी अंकित है। यह वृक्षारोपण उस समय किया गया जब भूमि वन विभाग को सौंपी जा चुकी थी। इसके बावजूद, नवीन इकाई की अनुमति मिलने के बाद एमपीपीजीसीएल द्वारा उसी भूमि को सोलर प्लांट स्थापना हेतु वापस मांगा जाने लगा, जिसको लेकर लगातार प्रशासनिक स्तर पर बैठकें चल रही थीं। पहले तो क्षतिपूर्ति के लिए भूमि दी गई और पौधारोपण करवाया गया, बाद में उसी भूमि को औद्योगिक उपयोग के लिये वापस मांगा जा रहा है।


इन्होंने जताई आपत्ति


इस मामले में सारनी निवासी वाइल्डलाइफ एवं नेचर कंजर्वेशन एक्टिविस्ट आदिल खान ने पहले स्थानीय स्तर पर आपत्ति लगाई परंतु बात नहीं बनी तो 24 मार्च 2024 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) मध्यप्रदेश सहित अन्य संबंधित विभागों को आपत्ति पत्र सौंपा। अपनी आपत्ति में आदिल खान ने स्पष्ट किया था कि यह राख बाँध केवल वृक्षारोपण का क्षेत्र नहीं है, बल्कि पहले से ही वन्यजीवों से समृद्ध एक घासभूमि की तरह है, जो सतपुड़ा मेलघाट टाइगर कॉरिडोर के निकट स्थित है। उन्होंने बताया था कि यहाँ लकड़बग्घा, सियार, साही, खरगोश, मोर, रेड मुनिया सहित सैकड़ों पक्षी प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं, वहीं वर्ष 2018–19 में इसी राख बाँध क्षेत्र से बाघ का रेस्क्यू भी किया जा चुका है।


प्रभावित होगा जीवन


उनका तर्क था कि यदि यहाँ सोलर प्लांट लगाया गया, तो इससे निकलने वाली गर्मी और मानवीय गतिविधियाँ न केवल स्थानीय जैव विविधता बल्कि पूरे टाइगर कॉरिडोर को प्रभावित करेंगी और यहाँ से उडऩे वाली राख से सारनी व आसपास के गाँव के लोगों का जीवन प्रभावित होगा। आपत्तियों और तथ्यों के आधार पर सोलर प्लांट हेतु यह भूमि एमपीपीजीसीएल को अभी तक वापस नहीं सौंपी गई, और क्षेत्र वन विभाग के संरक्षण में बना रहा। इसी क्रम में हाल ही में रविवार रात, जब आदिल खान राख बाँध क्षेत्र में रात्रिचर पक्षियों की उपस्थिति दर्ज करने पहुंचे, तब उन्हें वहाँ एक वयस्क तेंदुआ दिखाई दिया। यह घटना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यह क्षेत्र आज वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और महत्वपूर्ण बन गया है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। इस विषय में आदिल खान ने कहा कि राख बाँध में वन्यजीव पहले से मौजूद थे, वन विभाग के वृक्षारोपण ने इसे और मजबूत आवास बनाया। अगर उस समय आपत्ति नहीं लगाई जाती, तो आज यहाँ न तेंदुआ होता और न पक्षियों की यह विविधता। जंगलों और घासभूमियों को बचाना केवल वन्यजीवों के लिए नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण संतुलन के लिए ज़रूरी है।
इनका कहना…
साढ़े तीन सौ हेक्टेयर जमीन है। इसमें से 106 हेक्टेयर जमीन दी गई थी। शेष भूमि पर भी पौधरोपण किया जाना था परंतु रिनेवल एनर्जी संबंधित प्रोजेक्ट किया जा सकता है। पूर्व की कंडीशन रिलेक्स हो जाएगी। उन्होंने सोलर एनर्जी के संबंध में एक प्रस्ताव डाला हुआ था और उसके संबंध में अग्रिम कार्यवाही के लिए लिखा हुआ है। इसलिए प्लांटेशन का कार्य रूका हुआ है। उस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
नवीन गर्ग, डीएफओ, उत्तर सामान्य, बैतूल

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