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Political turmoil: एक संसदीय सीट से पति, पत्नी और पुत्र के जीतने का रिकार्ड छिंदवाड़ा के नाम

एक संसदीय सीट से पति, पत्नी और पुत्र के

भाजपा की पैनी निगाह बनाया नया संगठन संभाग

Political turmoil: बैतूल (सांध्य बैतूलवाणी)। 1980 से 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले तक बैतूल जिले की सीमा से लगे छिंदवाड़ा संसदीय सीट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का एकतरफा जलवा रहा है और छिंदवाड़ा सीट के गठन के बाद से 2024 के चुनाव तक गैर कांग्रेसी मात्र 2 बार ही इस सीट से सांसद बन पाए हैं जिसमें पूर्व में सुंदरलाल पटवा और वर्तमान में बंटी साहू सांसद निर्वाचित हुए। वर्तमान में जिले की अधिकांश विधानसभा सीटों पर भी कांग्रेस का कब्जा है। इसी को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कमलनाथ के गढ़ रहे छिंदवाड़ा को नया संगठन संभाग बनाया है। पूर्व में भाजपा संगठन में इसे जबलपुर संभाग में रखा गया था। चूंकि 2023 के चुनाव में छिंदवाड़ा जिले की सभी विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा हुआ था जिसको लेकर भाजपा में काफी मंथन हुआ और राजनैतिक समीक्षकों का यह मानना है कि अब भाजपा का यह प्रयास रहेगा कि वे 2028 के विधानसभा चुनाव में सभी सीटों पर कब्जा करें एवं 2029 के विधानसभा चुनाव में फिर एक बार 2024 का परिणाम दोहराया जाए।


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बनाए नए तीन संगठन संभाग


प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने प्रदेश संगठन में विस्तार के लिए बड़ा निर्णय लेते हुए प्रदेश में तीन नए संभाग बनाए हैं और 13 संभागीय प्रभारी घोषित किए हैं जिनमें नर्मदापुरम संभाग के लिए प्रदेश उपाध्यक्ष कांतदेव सिंह को प्रभारी बनाया है। नर्मदापुरम संभाग में बैतूल, नर्मदापुरम और हरदा जिले शामिल हैं। बीजेपी ने जिन 13 नेताओं को संभागीय प्रभारी बनाया है उनमें से चार नेता ऐसे हैं जो बीजेपी के प्रदेश पदाधिकारी नहीं हैं। तेज बहादुर सिंह, अभय यादव, विजय दुबे, गौरव सिरोठिया और सुरेश आर्य प्रदेश पदाधिकारी नहीं हैं। इन नेताओं को एडजस्टमेंट के हिसाब से संगठन में जिम्मेदारी देकर बैलेंस करने की कोशिश की गई है।


कमलनाथ परिवार ने बनाया था इतिहास


मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र ने कई इतिहास बनाए हैं जिनमें 1977 का लोकसभा चुनाव उल्लेखनीय रहा है। इस चुनाव में पूरे उत्तर भारत में मात्र 2 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस चुनाव जीती थी। इसमें मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा सीट भी शामिल थी। इस चुनाव में मध्यप्रदेश की बाकी सभी सीटों पर तत्कालीन जनता पार्टी (अब भाजपा) के उम्मीदवार चुनाव जीते थे। इसके बाद 1980 में मेरठ उत्तर प्रदेश के व्यापारी रहे कमलनाथ को कांग्रेस ने मौका दिया और उन्होंने इस सीट पर जीत का एक नया इतिहास बना दिया है। 1980 से चुनाव लड़ने के दौरान एक बार 1995 में राजनैतिक कारणों से उन्हें संसद सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा और उनकी पत्नी 1996 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस से लड़ी और सांसद निर्वाचित हुई। लेकिन 1997 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया और उपचुनाव हुए जिसमें भाजपा के सुंदरलाल पटवा जीत गए लेकिन 1998, 1999, 2004, 2009 एवं 2014 तक कमलनाथ इस सीट से सांसद निर्वाचित होते रहे। 2019 के चुनाव में कमलनाथ के पुत्र लोकसभा चुनाव लड़े और सांसद निर्वाचित हुए। उस समय कमलनाथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री और छिंदवाड़ा से विधायक थे। इस तरह से एक ही परिवार के पति-पत्नी और पुत्र के एक ही संसदीय सीट से चुनाव जीतने वाली संभवत: देश में छिंदवाड़ा लोकसभा सीट बन गई है।

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