भोपाल में RSS के 100 वर्ष पूरे होने पर प्रमुख जन गोष्ठी, राजनीति से लेकर स्वदेशी और युवाओं तक पर खुलकर बोले सरसंघचालक
Public meeting: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ को भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के नजरिए से देखना गलत है। संघ न तो किसी राजनीतिक दल को नियंत्रित करता है और न ही सत्ता, टिकट या चुनाव उसका उद्देश्य है। संघ का मूल लक्ष्य समाज की गुणवत्ता, चरित्र निर्माण और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है।
भोपाल में RSS के 100 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में भागवत ने कहा कि संघ की गतिविधियों—वर्दी, मार्च और लाठी अभ्यास—को देखकर इसे पैरा मिलिट्री संगठन समझना भी एक बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि मत, पंथ, भाषा और जाति अलग हो सकती है, लेकिन हिंदू पहचान हम सबको जोड़ती है। हमारी संस्कृति, धर्म और पूर्वज समान हैं।
मोहन भागवत की स्पीच की 10 बड़ी बातें
1. टैरिफ और विदेशी निर्भरता पर स्टैंड
अमेरिका के टैरिफ जैसे वैश्विक मुद्दों पर भागवत ने कहा कि भारत को स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए। विदेशी वस्तुएं यदि लें भी, तो भारत की शर्तों पर। भारत आत्मनिर्भर बनने की क्षमता रखता है।
2. नई पीढ़ी को भारतीयता से जोड़ने की जरूरत
जेन-जी और युवाओं को भारतीय संस्कृति, इतिहास और मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। चीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने राष्ट्रीय दृष्टि के महत्व पर जोर दिया।
3. फैशन, फास्ट फूड और परिवार पर चिंता
अंधी उपभोक्तावादी संस्कृति समाज को दिशा से भटका रही है। घर में विवेकानंद की तस्वीर होगी या किसी पॉप स्टार की—यह समाज की सोच तय करता है। परिवार के साथ बैठकर भोजन करने की परंपरा लौटनी चाहिए।
4. संघ को लेकर गलत नैरेटिव
समर्थक और विरोधी—दोनों ही कई बार संघ की गलत छवि पेश करते हैं। संघ की असली पहचान समाज निर्माण है और इसे समझाने के लिए संवाद जरूरी है।
5. न प्रतिक्रिया में जन्मा, न प्रतिस्पर्धा में
RSS किसी के विरोध में नहीं बना और न ही किसी से प्रतिस्पर्धा करता है। संस्थापक डॉ. हेडगेवार स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े थे और समाज संगठन की जरूरत को समझते थे।
6. समाज बदलेगा, तभी देश बदलेगा
देश का भविष्य नेता या नीतियां नहीं, बल्कि समाज की चेतना तय करती है। स्वतंत्रता तभी स्थायी है जब समाज में ‘स्व’ का बोध हो।
7. प्रेशर ग्रुप नहीं, समाज का संगठन
संघ ने कभी प्रेशर ग्रुप की तरह काम नहीं किया। उसका उद्देश्य सम्पूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना है।
8. संघ केवल स्वयंसेवक बनाता है
संघ स्वयंसेवक तैयार करता है, उन्हें रिमोट कंट्रोल से संचालित नहीं करता। स्वयंसेवक समाज की जरूरत के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं।
9. सज्जन शक्ति का नेटवर्क जरूरी
समाज सुधार केवल संघ ही नहीं करता। सभी मत-पंथों में अच्छे लोग हैं। इनके बीच सहयोगी नेटवर्क बनाना जरूरी है।
10. पंच परिवर्तन का आह्वान
भागवत ने समाज से पांच बिंदुओं पर काम करने का आह्वान किया—
- सामाजिक समरसता
- कुटुंब प्रबोधन
- पर्यावरण संरक्षण
- स्व-बोध
- नागरिक अनुशासन
देश सर्वोपरि, विघटनकारी भाषा स्वीकार नहीं
भागवत ने कहा कि देश को हर चीज से ऊपर रखना चाहिए। यह भारत के लिए जीने का समय है, मरने का नहीं। देश में विघटनकारी और हिंसक भाषा का कोई स्थान नहीं है।
पहले भी दे चुके हैं अहम बयान
1 दिसंबर, पुणे
भागवत बोले—प्रधानमंत्री मोदी की बात आज विश्व मंच पर सुनी जाती है। भारत को अब उसका उचित वैश्विक स्थान मिल रहा है।
18 नवंबर, गुवाहाटी
भागवत ने कहा—भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं। भारत और हिंदू एक ही सभ्यता के प्रतीक हैं।
साभार …..
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