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Red color marking: जंगल क्षेत्र में सड़क हादसों पर लगेगा brake: नौरादेही अभयारण्य में NHAI की नई तकनीक से सुरक्षित होगा 12 किमी डेंजर ज़ोन

जंगल क्षेत्र में सड़क हादसों पर लगेगा

Red color marking: : जंगल क्षेत्रों में बढ़ते सड़क हादसों और वन्य जीवों की मौत को रोकने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक नई, अनूठी तकनीक अपनाई है। जबलपुर–भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर नौरादेही अभयारण्य के भीतर स्थित 12 किलोमीटर लंबे डेंजर जोन को अब विशेष डिज़ाइन के साथ और भी सुरक्षित बनाया गया है।

तेज रफ्तार से बढ़ रहा था खतरा

नौरादेही के इस हिस्से में हिरन, नीलगाय और अन्य वन्य जीव बड़ी संख्या में विचरण करते हैं। टू-लेन सड़क पर अक्सर तेज रफ्तार वाहनों की टक्कर से जानवरों की मौत होती थी और कई गंभीर सड़क दुर्घटनाएं भी सामने आती थीं। फोर-लेन निर्माण के दौरान यह खतरा और बढ़ सकता था, इसलिए NHAI ने शुरुआत से ही तकनीक आधारित सुरक्षा उपायों को योजना का हिस्सा बनाया।


2 किलोमीटर के हिस्से में ‘टेबल टॉप मार्किंग’

सबसे संवेदनशील हिस्से में सड़क पर 5 एमएम मोटी रेड कलर टेबल-टॉप मार्किंग बिछाई गई है।
इसकी खासियत:

  • वाहन गुजरते समय हल्के झटके महसूस होते हैं।
  • झटकों और लाल रंग के कारण चालक स्वतः गति कम करता है।
  • रेड मार्किंग मनोवैज्ञानिक रूप से “खतरे का संकेत” देती है, जिससे रफ्तार नियंत्रित रहती है।

नींद या वाहन भटकने पर भी तुरंत चेतावनी

सड़क के दोनों ओर 5 एमएम मोटी व्हाइट पैवर शोल्डर लाइन बनाई गई है।
इसका उद्देश्य:

  • अगर चालक को नींद आ जाए या वाहन किनारे की ओर खिसके
    ➡ झटके के कारण ड्राइवर तुरंत सतर्क हो जाता है।
  • यह सड़क को ब्लैक स्पॉट बनने से रोकने वाला प्रभावी उपाय माना गया है।

वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए 25 अंडरपास

अभयारण्य में जानवर अक्सर सड़क पार करते हैं, जिससे जानमाल का बड़ा जोखिम रहता है।
इसे रोकने के लिए यहाँ 25 अंडरपास बनाए गए हैं, ताकि हिरन, नीलगाय, तेंदुआ, भालू जैसे वन्य जीव बिना सड़क पर आए सुरक्षित तरीके से मार्ग पार कर सकें।


परियोजना की टाइमलाइन

प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृतलाल साहू के अनुसार:

  • 2020: वाइल्डलाइफ विभाग से 12 किमी हिस्से में फोर-लेन निर्माण की अनुमति मिली
  • 2021: निर्माण कार्य शुरू
  • 2025: परियोजना पूर्ण

उन्होंने कहा कि फोर-लेन बनने पर गति बढ़ने से दुर्घटनाओं का खतरा ज्यादा होता है, इसलिए डिज़ाइन के दौरान ही सुरक्षा उपाय तय कर लिए गए थे।


एक नज़र में—परियोजना के मुख्य बिंदु

  • कुल लागत: ₹122 करोड़
  • पुरानी टू-लेन सड़क को फोर-लेन में बदला गया
  • 12 किमी डेंजर ज़ोन में विशेष तकनीक आधारित सुरक्षा उपाय
  • 2 किमी हिस्से में 5 एमएम मोटी रेड टेबल-टॉप मार्किंग
  • व्हाइट पैवर शोल्डर लाइन से नींद या विचलन पर चेतावनी
  • वन्य जीवों के लिए 25 अंडरपास
  • साभार… 

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