Ruckus: घोड़ाडोंगरी के वार्ड क्रमांक 1 में एक नंदी बैल की मौत ने पशु चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि नंदी पिछले दो दिनों से बीमार था, लेकिन उसे समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका।
⚠️ सूचना के बाद भी मौके पर नहीं पहुंचे अधिकारी
स्थानीय लोगों ने मामले की सूचना बजरंग दल को दी। इसके बाद कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और स्थिति गंभीर देख पशु चिकित्सालय से संपर्क किया।
👉 आरोप है कि:
- असिस्टेंट वेटरनरी फील्ड ऑफिसर मनीराम आहके खुद मौके पर नहीं पहुंचे
- उनकी जगह केवल परिचालक को भेजा गया
- प्राथमिक उपचार के बाद कुछ ही देर में नंदी की मौत हो गई
🔁 पहले भी लग चुके हैं लापरवाही के आरोप
बजरंग दल कार्यकर्ताओं का कहना है कि संबंधित अधिकारी पर पहले भी इस तरह की लापरवाही के आरोप लग चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
🗣️ जिम्मेदारों के अलग-अलग बयान
घटना के बाद अधिकारियों के बयान भी एक-दूसरे से अलग नजर आए:
- मनीराम आहके (असिस्टेंट वेटरनरी फील्ड ऑफिसर):
“मेरा काम केवल वैक्सीनेशन का है, इलाज करना नहीं।” - कीर्ति ठाकरे (असिस्टेंट वेटरनरी सर्जन):
“मेरे पास तीन जगह का प्रभार है। संबंधित हॉस्पिटल में डॉक्टर मौजूद थे, उन्हें ही जाना चाहिए था। मैं नोटिस जारी करूंगी।”
👉 इन बयानों से विभागीय समन्वय की कमी साफ दिखती है।
❗ जवाबदेही पर उठे बड़े सवाल
- सूचना के बावजूद अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे?
- डॉक्टर की जगह परिचालक को क्यों भेजा गया?
- विभाग में जिम्मेदारी स्पष्ट क्यों नहीं है?
यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और जिम्मेदारी तय न होने की बड़ी समस्या को उजागर करती है।
😠 क्षेत्र में नाराजगी, कार्रवाई की मांग
घटना के बाद इलाके में लोगों में आक्रोश है। बजरंग दल ने प्रशासन से मांग की है कि:
- मामले की निष्पक्ष जांच हो
- दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए
⚖️ बड़ा सवाल
अगर जिम्मेदार अधिकारी ही अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटेंगे, तो बीमार और बेसहारा पशुओं का इलाज कैसे होगा?
👉 यह घटना सिर्फ एक नंदी की मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियों को उजागर करने वाला मामला बन गई है।
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