ऊर्जा सुरक्षा के लिए खाड़ी में युद्धपोतों की संख्या बढ़ाई, ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत कार्रवाई तेज
Tension: नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर पहुंच गया है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की इस अहम लाइफलाइन पर बढ़ते खतरों को देखते हुए भारतीय नौसेना ने बड़ा कदम उठाते हुए खाड़ी क्षेत्र में अपने युद्धपोतों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है।
6-7 युद्धपोतों की तैनाती
मौजूदा हालात को देखते हुए नौसेना ने पहले से तैनात तीन युद्धपोतों के अलावा अतिरिक्त जहाज भेजने का निर्णय लिया है। इसके बाद क्षेत्र में कुल 6 से 7 युद्धपोत सक्रिय रहेंगे, जो भारतीय तेल और गैस टैंकरों को सुरक्षित मार्ग प्रदान करेंगे।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
यह समुद्री मार्ग रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, जहां:
- एक ओर फारस की खाड़ी
- दूसरी ओर ओमान की खाड़ी स्थित है
दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों पर निर्भर है।
22 भारतीय जहाज फंसे
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे भारत के करीब 22 व्यापारिक जहाज फंस गए हैं।
‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत कार्रवाई
नौसेना यह मिशन ऑपरेशन संकल्प के तहत चला रही है, जिसकी शुरुआत 2019 में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी।
सुरक्षित पहुंचाए गए जहाज
नौसेना की मुस्तैदी का असर भी दिखा है:
- “शिवालिक” और “नंदा देवी” नामक एलपीजी जहाजों को 92,712 मीट्रिक टन गैस के साथ सुरक्षित भारत पहुंचाया गया
- एक तेल टैंकर को फुजैरा पोर्ट से एस्कॉर्ट कर सुरक्षित मार्ग दिया गया
अदन की खाड़ी में भी सक्रिय भारत
भारतीय नौसेना 2008 से अदन की खाड़ी में एंटी-पायरेसी मिशन भी चला रही है, जो समुद्र में भारत की बढ़ती ताकत और जिम्मेदारी को दर्शाता है।
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