अस्थायी अमेरिकी छूट के बाद 50 लाख बैरल की डील
The Barrel Deal: नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद फिर शुरू कर दी है। अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में दी गई अस्थायी छूट के बाद भारत की बड़ी कंपनी Reliance Industries ने ईरान से 50 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदने की डील पक्की की है। हालांकि, यह सौदा भारत के लिए महंगा साबित हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह तेल ब्रेंट क्रूड के मुकाबले करीब 7 डॉलर प्रति बैरल ज्यादा कीमत पर खरीदा गया है।
🇺🇸 क्या है अमेरिकी छूट?
United States प्रशासन ने हाल ही में ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में 30 दिन की अस्थायी छूट दी है।
- यह छूट केवल उन जहाजों पर लागू है
- जो 20 मार्च तक लोड हो चुके हैं
- और 19 अप्रैल तक डिलीवर होंगे
इस सीमित समय का फायदा उठाकर भारत ने यह डील की है।
⛽ 2019 के बाद पहली बार ईरान से खरीद
India ने मई 2019 के बाद पहली बार Iran से तेल खरीदा है।
- अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण पहले आयात बंद था
- अब सप्लाई संकट के बीच फिर से खरीद शुरू हुई
👉 भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, ऐसे में सप्लाई बनाए रखना बेहद जरूरी है।
🌍 वैश्विक संकट और चीन का रोल
हाल के वर्षों में China की रिफाइनरियां भारी मात्रा में ईरानी तेल खरीदती रही हैं।
- कई बार यह तेल ब्लैक मार्केट के जरिए पहुंचता है
- और दूसरे देशों के नाम से रीब्रांड कर बेचा जाता है
हालांकि, ताजा रिपोर्ट में चीन की एक बड़ी कंपनी ने ईरानी तेल खरीदने से इनकार किया है।
🚢 कैसे पहुंचेगा तेल भारत?
ईरान से भारत तक तेल का प्रमुख समुद्री मार्ग:
- Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य)
- अरब सागर
- भारत के पश्चिमी तट (जामनगर, मुंबई)
👉 ईरान के प्रमुख टर्मिनल जैसे खार्ग द्वीप से टैंकर निकलते हैं।
हालांकि, क्षेत्रीय तनाव के चलते इस समय इस मार्ग पर सुरक्षा जोखिम भी बना हुआ है।
साभार…
⚠️ युद्ध के बीच सप्लाई की चुनौती
- पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित
- भारत पहले ही रूस से 4 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल खरीद चुका है
- अब ईरान से डील सप्लाई को संतुलित करने की कोशिश है
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