तलवार से लेकर कार तक: कैसे युद्ध, औद्योगिक क्रांति और ब्रिटिश शासन ने बनाए ट्रैफिक नियम
Traffic rules: डिजिटल डेस्क। दुनिया के अलग-अलग देशों में ड्राइविंग के नियम अलग-अलग हैं। कहीं गाड़ियां सड़क के दाईं ओर चलती हैं तो कहीं बाईं ओर। हॉलीवुड फिल्मों में अक्सर कारें सड़क के दाईं ओर दौड़ती दिखती हैं, जबकि भारत में वाहन बाईं ओर चलते हैं और स्टीयरिंग व्हील दाईं तरफ होता है। यह फर्क किसी आधुनिक इंजीनियरिंग का नतीजा नहीं, बल्कि सदियों पुराने इतिहास, युद्ध की रणनीतियों और औद्योगिक क्रांति से जुड़ा है।
घुड़सवारी और तलवार से शुरू हुआ ट्रैफिक नियम
18वीं और 19वीं शताब्दी में जब घोड़े और घोड़ागाड़ियां यातायात का मुख्य साधन थीं, तब लोग आमतौर पर सड़क के बाईं ओर चलते थे। इसका एक व्यावहारिक कारण था—
- अधिकांश लोग दाएं हाथ से काम करने वाले होते थे
- तलवार दाईं ओर लटकाई जाती थी
- बाईं ओर चलने से सामने से आने वाले दुश्मन पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर तलवार निकालना आसान होता था
ब्रिटिश शासन ने इसी व्यवस्था को भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में लागू किया, जो आज तक चली आ रही है।
आजादी के बाद क्यों नहीं बदला गया सिस्टम?
आजादी के बाद इस नियम को बदलना आसान नहीं था।
- पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से लेफ्ट-साइड ड्राइव पर आधारित था
- घनी आबादी और संकरी सड़कें
- लाखों मौजूदा वाहन
इन सभी कारणों से इस व्यवस्था को बदलना महंगा और जटिल साबित होता, इसलिए इसे बनाए रखा गया।
दुनिया के 75% देश दाईं ओर क्यों चलाते हैं वाहन?
आज अमेरिका, चीन, रूस, मिडिल ईस्ट और अधिकांश यूरोपीय देशों में वाहन दाईं ओर चलते हैं। इसके पीछे दो बड़े कारण माने जाते हैं—
नेपोलियन का प्रभाव
मध्ययुगीन यूरोप में नेपोलियन बोनापार्ट ने सैन्य रणनीति के तहत दाईं ओर चलने के नियम को बढ़ावा दिया। बाद में जिन देशों पर फ्रांस का प्रभाव रहा, वहां यही नियम अपनाया गया।
हेनरी फोर्ड और औद्योगिक क्रांति
20वीं सदी की शुरुआत में हेनरी फोर्ड ने अपनी कारों (जैसे मॉडल-T) में स्टीयरिंग व्हील बाईं ओर दिया।
इससे सड़क के दाईं ओर गाड़ी चलाना आसान हो गया।
फोर्ड की सस्ती कारों का बड़े पैमाने पर निर्यात हुआ और राइट-हैंड ट्रैफिक एक वैश्विक मानक बन गया।
ब्रिटेन ने दी लेफ्ट-साइड ड्राइव को पहचान
दुनिया में आज भी कई देश ऐसे हैं, जहां गाड़ियां बाईं ओर चलती हैं। इनमें शामिल हैं—
- यूनाइटेड किंगडम
- भारत, श्रीलंका, नेपाल
- जापान
- थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया
- ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड
- दक्षिण अफ्रीका के कुछ हिस्से
इनमें ब्रिटेन सबसे प्रमुख देश है, जिसने इस नियम को वैश्विक पहचान दी। आयरलैंड, माल्टा और साइप्रस में भी यही व्यवस्था लागू है।
जापान का अनोखा मामला
दिलचस्प बात यह है कि जापान कभी ब्रिटेन का उपनिवेश नहीं रहा, फिर भी वहां भारत की तरह बाईं ओर ड्राइविंग होती है।
इसका कारण है जापान का रेलवे नेटवर्क—
- शुरुआती रेल लाइनें ब्रिटिश इंजीनियरों ने बिछाईं
- उन्होंने लेफ्ट-साइड सिस्टम लागू किया
- बाद में सड़क परिवहन के नियम भी उसी आधार पर तय किए गए
इतिहास आज भी सड़कों पर दिखता है
आज जब हम सड़क पर वाहन चलाते हैं, तो शायद यह नहीं सोचते कि यह नियम तलवार, युद्ध और औद्योगिक क्रांति से जुड़ा है। लेकिन सच्चाई यही है कि आज की ट्रैफिक व्यवस्था इतिहास की देन है, जो सदियों बाद भी हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को दिशा दे रही है।
साभार…
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