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Weather: मध्यप्रदेश में एक्सट्रीम वेदर से बढ़ा खतरा, 2025 में 500 से ज्यादा मौतें

मध्यप्रदेश में एक्सट्रीम वेदर से बढ़ा

CSE की ‘स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट 2026’ रिपोर्ट में खुलासा, अप्रैल–मई में हीटवेव की आशंका

Weather: भोपाल। मध्यप्रदेश में साल 2025 के दौरान एक्सट्रीम वेदर वाले दिनों की संख्या भले ही पहले की तुलना में कम रही, लेकिन मौसम से जुड़ी घटनाओं में मौतों का आंकड़ा 500 के पार पहुंच गया। यह खुलासा सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (CSE) की वर्ष 2026 की ‘स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट’ (SOE) रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2025 में एक्सट्रीम वेदर के 162 दिन दर्ज किए गए, जिनमें 537 लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में अधिक गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

मार्च की शुरुआत में ही बढ़ने लगी गर्मी

प्रदेश में मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का असर दिखने लगा है। कई जिलों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास या उससे ऊपर पहुंच गया है। इंदौर संभाग के निमाड़ क्षेत्र में सबसे ज्यादा गर्मी दर्ज की गई, जहां खरगोन में तापमान 35.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके अलावा भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर सहित कई शहर भी बढ़ती गर्मी की चपेट में हैं।

अप्रैल–मई में ज्यादा रहेगा हीटवेव का असर

मौसम विभाग के अनुसार मार्च से मई के बीच मध्यप्रदेश में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी बढ़ सकता है। हालांकि हीटवेव जैसी गंभीर परिस्थितियों का असर अप्रैल और मई में ज्यादा देखने को मिल सकता है।

मौसम विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. दिव्या सुरेंद्र के अनुसार राज्य के कई क्षेत्रों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहने का अनुमान है। विशेष रूप से सीधी, सिंगरौली, विदिशा और सागर जैसे नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्रों में तापमान बढ़ने की संभावना करीब 70 प्रतिशत तक है।

एक्सट्रीम वेदर की तीव्रता बढ़ी

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में मौसम संबंधी घटनाओं की संख्या भले कम हुई है, लेकिन उनकी तीव्रता और प्रभाव अधिक घातक होते जा रहे हैं।

  • 2022: 183 दिन एक्सट्रीम वेदर, 301 मौतें
  • 2023: 171 दिन, 253 मौतें
  • 2024: 237 दिन, 353 मौतें
  • 2025: 162 दिन, 537 मौतें

यह ट्रेंड दर्शाता है कि मौसम की घटनाएं पहले से ज्यादा खतरनाक हो रही हैं और जनहानि का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है।

देश में भी बढ़ी मौसम जनित मौतें

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में देशभर में लगभग 99 प्रतिशत दिनों में किसी न किसी रूप में एक्सट्रीम वेदर की घटनाएं दर्ज हुईं। इन घटनाओं में कुल 4,419 लोगों की मौत हुई, जो 2024 की तुलना में काफी अधिक है।

इन घटनाओं में हीटवेव, कोल्ड वेव, बिजली गिरना, तूफान, चक्रवात, क्लाउडबर्स्ट, भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाएं शामिल हैं। इसके अलावा खराब मौसम के कारण देश में 77 हजार से ज्यादा पशुओं की भी मौत हुई।

क्या होता है एक्सट्रीम वेदर

एक्सट्रीम वेदर ऐसे मौसम को कहा जाता है जब परिस्थितियां सामान्य से बहुत ज्यादा अलग और खतरनाक हो जाती हैं। इसमें तेज बारिश, आंधी-तूफान, ओलावृष्टि, भीषण गर्मी या कड़ाके की ठंड जैसी स्थितियां शामिल होती हैं। ऐसे समय में लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता बढ़ रही है, जिससे आने वाले वर्षों में ऐसी घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है।

साभार…

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