सोयाबीन में देश में नंबर-1, गेहूं उत्पादन में दूसरा स्थान
2nd place: भोपाल। भारत दुनिया के प्रमुख कृषि प्रधान देशों में शामिल है, जहां विभिन्न प्रकार की फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश अपनी भौगोलिक विविधता के कारण देश के सबसे महत्वपूर्ण कृषि राज्यों में गिना जाता है।
प्रदेश में खरीफ सीजन में सोयाबीन और रबी सीजन में गेहूं की खेती सबसे बड़े पैमाने पर की जाती है। सोयाबीन उत्पादन में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जबकि गेहूं उत्पादन में यह दूसरे स्थान पर आता है। इसके अलावा यहां चना, मक्का और विभिन्न दलहनों की भी बड़े स्तर पर खेती होती है।
🔹 मालवा पठार और नर्मदा घाटी बने खेती के केंद्र
प्रदेश में सबसे अधिक और उन्नत खेती मुख्य रूप से मालवा पठार और नर्मदा घाटी क्षेत्रों में होती है। मालवा क्षेत्र में इंदौर, उज्जैन, धार, रतलाम और सीहोर जैसे जिले शामिल हैं, जहां सोयाबीन और चने की खेती प्रमुख रूप से की जाती है।
वहीं नर्मदा घाटी क्षेत्र में नर्मदापुरम, नरसिंहपुर और जबलपुर प्रमुख हैं, जो गेहूं उत्पादन के लिए जाने जाते हैं।
🔹 काली मिट्टी और ‘शरबती गेहूं’ की पहचान
मालवा क्षेत्र की काली मिट्टी सोयाबीन के लिए बेहद उपजाऊ मानी जाती है। वहीं सीहोर और विदिशा का ‘शरबती गेहूं’ अपनी मिठास और उच्च गुणवत्ता के कारण देशभर में प्रसिद्ध है।
🔹 किसानों की आय में बढ़ोतरी
इन क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों और अनुकूल जलवायु के चलते किसान अच्छी पैदावार कर रहे हैं, जिससे उनकी सालाना आय लाखों रुपये तक पहुंच रही है।
👉 वर्तमान आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में लगभग 145 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की खेती की जा रही है, जो इसकी कृषि क्षमता को दर्शाता है।
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