Device: भोपाल। छिंदवाड़ा, पांढुर्ना और बैतूल में विषाक्त कफ सीरप से 24 बच्चों की मौत के बाद मध्य प्रदेश सरकार अब औषधियों की गुणवत्ता जांचने के लिए अत्याधुनिक तकनीक अपनाने जा रही है। औषधि प्रशासन विभाग जल्द ही अपने निरीक्षकों को हैंडहेल्ड टेस्टिंग डिवाइस देने जा रहा है, जिससे मौके पर ही दवा की गुणवत्ता का पता लगाया जा सकेगा।
🔬 दवा पर रखते ही मिलेगी रिपोर्ट
इस डिवाइस को दवा के ऊपर रखते ही यह तुरंत बता देगा कि उसमें सक्रिय तत्व (पाउडर) की मात्रा सही है या नहीं। यदि किसी दवा में यह तत्व कम पाया गया तो उसका सैंपल लैब में भेजकर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
🏥 सरकारी और निजी दोनों जगह होगी जांच
इन डिवाइस का उपयोग सरकारी और निजी दोनों फार्मेसियों में किया जाएगा। अभी तक ऐसी तकनीक का उपयोग केवल महाराष्ट्र में हो रहा है। मध्य प्रदेश इस दिशा में कदम बढ़ाने वाला देश का दूसरा राज्य बनेगा।
💰 211 करोड़ से मजबूत होंगी प्रयोगशालाएं
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने बताया कि प्रदेश की औषधि प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए 211 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके लिए केंद्र सरकार से भी आर्थिक सहायता मांगी जा रही है।
⚙️ आठ हाई-टेक डिवाइस होंगी खरीदी
शुरुआत में 8 हैंडहेल्ड डिवाइस खरीदी जाएंगी, जिनकी प्रति इकाई कीमत लगभग 50 लाख रुपये है। इनका उपयोग औषधि निरीक्षक फील्ड में करेंगे ताकि नकली या घटिया दवाओं को तुरंत पकड़ा जा सके।
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