पारंपरिक कला और ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
Tourism Village: भोपाल। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग अब महेश्वर और कुक्षी को राज्य के नए टेक्सटाइल और क्राफ्ट टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने जा रहा है। चंदेरी के प्राणपुर हैंडलूम टूरिज्म विलेज की सफलता से प्रेरित होकर, सरकार महेश्वर के पास केरिया खेड़ी गांव को हैंडलूम टूरिज्म विलेज और धार जिले के कुक्षी को क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में तैयार कर रही है।
महेश्वर में दिखेगी महेश्वरी साड़ी की बुनाई
खरगोन जिले के महेश्वर से करीब 4 किलोमीटर दूर स्थित केरिया खेड़ी गांव में लगभग 100 परिवार पारंपरिक महेश्वरी साड़ियां, सलवार-सूट और वस्त्र बुनते हैं। अब यहां पर्यटक बुनाई की पूरी प्रक्रिया लाइव देख सकेंगे। गांव में कैफेटेरिया, अनुभव केंद्र और विक्रय केंद्र की स्थापना की जाएगी, साथ ही ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार किया जाएगा।
केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय से स्वीकृत ₹5.11 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना पर जल्द काम शुरू होने जा रहा है। इसे जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना से महेश्वर में पर्यटन का दबाव कम होगा और आसपास के गांवों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
कुक्षी बनेगा क्राफ्ट टूरिज्म का केंद्र
धार जिले का कुक्षी, जो अपनी बाग प्रिंट कला के लिए प्रसिद्ध है, अब क्राफ्ट टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित होगा। यहां लगभग 1500 बाग कारीगर पारंपरिक प्रिंटिंग कार्य करते हैं। परियोजना का कुल बजट ₹20.60 करोड़ है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
गांव में डाई हाउस, कैफेटेरिया, अनुभव केंद्र और विक्रय सुविधाएं बनाई जाएंगी ताकि पर्यटक सीधे कारीगरों से वस्त्र खरीद सकें।
पारंपरिक कला को नया जीवन
प्राणपुर (चंदेरी) मॉडल को अपनाकर इन नई परियोजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हस्तशिल्प और पर्यटन को एक साथ सशक्त बनाना है। प्राणपुर को इसी अवधारणा के तहत विकसित किया गया था और उसे केंद्र सरकार द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम’ का पुरस्कार भी मिला था।
डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, अपर प्रबंध संचालक, मप्र पर्यटन बोर्ड ने बताया —
“प्राणपुर की सफलता से प्रेरित होकर महेश्वर और कुक्षी में पर्यटन ग्राम विकसित किए जा रहे हैं। दोनों स्थानों के टेंडर हो चुके हैं और कार्य शीघ्र शुरू किया जाएगा।”
साभार…
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