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State of dispute: खाद के लिए लगाई परमिट की लाइन

खाद के लिए लगाई

दो दिन से आ रही महिला पर नहीं मिल रही खाद

State of dispute: खेड़ी सांवलीगढ़।मनोहर अग्रवाल/ खाद के लिए हर साल किसानों को कड़ाकी की ठण्ड में परेशान होने को मजबूर होना पड़ता है लेकिन कृषि विभाग और जिला प्रशासन द्वारा किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं करा पाता है। किसान अपना कामकाज छोडक़र खाद मिलने की आस में कई किलोमीटर पैदल चलकर सोसायटी तक पहुंचते हैं लेकिन जब तक उनका नंबर आता है या तो खाद खत्म हो जाती है या फिर उनका नंबर ही नहीं आ पाता है। कुल मिलाकर किसानों को हर साल कृषि विभाग और जिला प्रशासन के अफसर परेशान करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। यही हाल इस बार भी हो रहा है।


खाद की कहानी बुजुर्गों की जुबानी


प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय के समीप आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में यूरिया खाद वितरण को लेकर हमेशा विवाद की स्थिति बनती है। फिलहाल यूरिया खाद सोसायटी में आया तो है लेकिन प्रतिदिन मात्र 40 परमिट काटकर टोकन दिए जा रहे। खाद लेने के लिए खेड़ी सोसायटी में आए बुजुर्ग किसानों ने खाद की कहानी अपनी जुबानी बताई है कि वह कितने अधिक परेशान हो चुके हैं। बुजुर्गों और महिलाओं का कहना है कि उन्हें हाड़ कपा देने वाली ठण्ड में परेशाना होना पड़ रहा है लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है।


कड़ाके की ठण्ड में हो रहे परेशान


देवगांव निवासी बुजुर्ग किसान केलोबाई सहित अन्य किसानों ने बताया कि वह सुबह से ही हाड़ कपा देने वाली ठंड में ठिठुरते हुए आते है और परमिट जमा न होने पर बगैर खाद लिए वापस हो जाते है। आज सुबह 7 बजे भी देवगांव के समीप चौकी गांव की 70 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग केलो बाई आई तो सोसायटी परिसर में बंद दफ्तर के सामने नीचे रखे परमिटों की लाइन में अपना परमिट लाइन में लगा देती है और कहती है वह लगातार दो दिन से चौकी गांव से पैदल 10 किलोमीटर चलकर आ रही है लेकिन उसका नंबर नहीं पा रहा है।


महिला ने सुनाई खरी खोटी


ग्राम चौकी की उर्मिला बाई के साथ आई महिलाओं ने भी तमतमाते हुए सोसायटी वालों को ही भला बुरा कहना शुरु कर दिया कि हम बिना खाना खाए घर आते है और हमें सुबह 8 बजे से बुलाकर भी नबर नहीं लगाया जाता है। जमीन पर परमिट की लाइन लगी हुई है। उन्होंने ऐसे में खाद वितरण व्यस्था पर प्रश्नचिन्ह लग दिया है कि ये कैसी व्यवस्था है। जिस सोसायटी में 21 गांव है वहां महज एक आई डी पर परमिट काटते है कैसे व्यस्था दुरुस्त होगी? जिला कलेक्टर को इस ओर ध्यान देना चाहिए ताकि किसान परेशान ना हो सके।

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