बैतूलवाणी के रू-ब-रू कार्यक्रम में खुलकर बोले डॉ. योगेश पंडाग्रे

Interview:बैतूल। आमला-सारनी विधानसभा सीट से दो बाद के विधायक डॉ. योगेश पंडाग्रे का बैतूलवाणी के रू-ब-रू कार्यक्रम में एंकर संजय शुक्ला ने उनका साक्षात्कार लिया। साक्षात्कार में डॉक्टर पंडाग्रे ने राजनैतिक, प्रशासनिक एवं सामाजिक विषयों पर पूरी बेबाकी के साथ जवाब दिए। डॉक्टर योगेश पंडाग्रे का पूरा इंटरव्यू बैतूलवाणी के यूट्यूब चैनल पर देखिए।
संजय शुक्ला-आप एमडी मेडिसिन डॉक्टर हैं, आपकी प्रैक्टिस और आपका हॉस्पिटल दोनों ही बहुत अच्छे चलते हैं लेकिन अचानक राजनीति में आने का विचार कैसे आया?
डॉ. योगेश पंडाग्रे- बैतूल में मैंने हॉस्पिटल में शुरू किया तब तक मेरी राजनीति में आने की रूचि नहीं थी। लेकिन बीच में सभी लोगों ने कहा कि राजनीति अच्छा क्षेत्र है। इसके बाद राजनीति की ओर झुकाव बढ़ता रहा। मुझे चुनाव लडऩे का अवसर पार्टी ने 2018 में दिया। जहां तक राजनीति और चिकित्सा का सवाल है दोनों में सेवा का अवसर मिलता है, यही सोचकर मैंने राजनीति में सक्रिय भूमिका शुरू की।
संजय शुक्ला:- आपको 2018 में पहली बार आमला विधानसभा से भाजपा ने 2 बार के भाजपा विधायक चैतराम मानेकर की टिकट काटकर दी। आपको कैसे टिकट मिली थी?
डॉ. योगेश पंडाग्रे– पहले 2013 में टिकट नहीं मिली लेकिन 2018 में पार्टी को लगा कि टिकट देनी चाहिए इसलिए पार्टी ने टिकट दी और मैं 2018 में चुनाव लड़ा और जीता भी। इसके बाद दोबारा भी मुझे भाजपा ने अवसर दिया और पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है। 2023 में भी मैंने जीत हासिल की।
संजय शुक्ला- आपके राजनैतिक गुरु कौन है जिन्होंने आपको राजनीति में सक्रिय किया?
डॉ. योगेश पंडाग्रे-बड़ा मुश्किल सवाल है ये। किसी का नाम ले तो दूसरे को बुरा ना लग जाए। कभी-कभी ऐसा होता है तो कि अपने सोचने का तरीका होता है और विचाराधारा होती है। कुछ लोग पार्टी में होते हैं जिनसे आप प्रभावित होती है। हमारी पार्टी के नेता सौम्य रहते हैं और मुझे सभी का आशीर्वाद मिला।
संजय शुक्ला- पाथाखेड़ा-सारनी आपके विधानसभा के अंतर्गत आते हैं यहां भाजपा में कई गुट हैं, इन्हें आप कैसे मैनेज करते हैं?
डॉ. योगेश पंडाग्रे- भारतीय जनता पार्टी में आतंरिक लोकतंत्र है। सबको अपनी बात रखने का अधिकार है। भाजपा एक परिवार की पार्टी नहीं है। पार्टी को सभी सकारात्मक दिशा में ले जाने के लिए विचारों का मतभेद हो सकता है लेकिन मनभेद नहीं है।
संजय शुक्ला- ऐसी क्या मजबूरी थी कि सारनी नगर पालिका क्षेत्र में कई सक्रिय और लंबे समय से पार्टी के प्रति वफादार नेता होने के बावजूद कुछ समय पूर्व कांग्रेस से आए किशोर वरदे को नपा का अध्यक्ष बनाया?
डॉ. योगेश पंडाग्रे- पार्टी संगठन तय करता है कि किसको किस दायित्व पर रखना है। जहां तक किशोर बरदे की बात तो वे मेरी सक्रियता के पहले पार्टी में आए थे। और मेरे चुनाव में भी उन्होंने ताकत से काम किया था। और उन्हें पार्टी के सभी पार्षदों ने चुनाव था, उन्होंने पार्टी के सभी दिशा निर्देश पूरे किए हैं।
संजय शुक्ला- आप जब पहला विधानसभा चुनाव लड़े तब आपको बाहरी प्रत्याशी बताया गया था इसके बावजूद आप चुनाव जीते, इसका श्रेय किसे देंगे?
डॉ. योगेश पंडाग्रे- भारतीय जनता पार्टी कैडर बेस पार्टी है। कार्यकर्ताओं का समन्वय है। बीते 10 सालों से मैं वहां कार्य कर रहा हूं। लोगों से जुड़ाव था ही। जो बाहरी प्रत्याशी की बात कर रहे हैं मैं तो सुसंद्रा का ही हूं। स्कूलिंग भी वहीं की है। मुझे डॉक्टरी की प्रैक्टिस करने बड़े शहर में आना था तो मैं अपने ही जिले में काम कर रहा हूं। कांग्रेस के जो मुझे बाहरी बता रहे हैं। मैं उनसे पूछता हूं कि कांग्रेस जिस महिला को टिकट देने की बात कर रही थी वो कहां की थी? कांग्रेसियों को भी उसके स्थायी निवास का भी पता नहीं है।
संजय शुक्ला- आमला सीट से चुनाव लडऩे के लिए एक अधिकारी को भी भोपाल से बैतूल लाकर सक्रिय कर दिया गया है इस बारे में आपका क्या कहना है?
डॉ. योगेश पंडाग्रे- कोई अधिकारी अगर मेरे समाज का यहां आकर काम करता है तो मैं भी चाहता हूं कि समाज के आदमी आगे बढ़े। लेकिन जैसे ही कोई सामाजिक व्यक्ति आता है तो लोग मेरा प्रतिद्वंदी बताने लगते हैं।
संजय शक्ला- ऐसी चर्चा है कि पूर्व डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे की आपने ही जिले से रवानगी करवाई थी क्योंकि उन्होंने आमला में चुनाव लडऩे सक्रिय हो गई थी?
डॉ. योगेश पंडाग्रे- मैं रचनात्मक पॉलीटिक्स करता हूं। समय का अभाव वैसे ही रहता है। हास्पिटल और राजनीति दोनों में समय देना पड़ता है। और आपका कहना है कि मैंने किसी को हटवाया है तो मेरे सामने कोई तो कांग्रेस का प्रत्याशी होगा ही तो मैं क्यों किसी को हटाने के लिए अपना समय बर्बाद करूंगा। जिसका आपने नाम लिया (निशा बांगरे) उनसे पूछिए कि उनकी आमला में पोस्टिंग किसने करवायी थी। आमला में पोस्टिंग कराने का श्रेय मेरा है।
संजय शुक्ला- ऐसा माना जाता है कि 2018 से 2023 तक आप जिले के इकलौते विधायक थे। इस दौर में अधिकांश अधिकारियों की पदस्थापना जिले में आपने करवाई थी। अभी आप अपनी स्थिति क्या मानते हैं?
डॉ. योगेश पंडाग्रे- मैं विकास के काम में भरोसा करता हूं। मेरे विधानसभा क्षेत्र आमला-सारनी के लिए बड़े-बड़े प्रोजेक्ट स्वीकृत करवाएं हैं और मैं अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग में भरोसा नही करता हूं। जो गलत करेगा उसको हटाया जाएगा। 2018 से 2023 तक मैं अकेला विधायक जरूर था लेकिन किस अधिकारी को जिले में रखना है या नहीं रखना है इसका निर्णय पार्टी की प्रबंध समिति एवं बड़े जनप्रतिनिधि मिलकर करते हैं। और यही पार्टी की परिपाटी है। हमारे यहां संगठन सर्वोपरि है। हेमंत भैय्या, डीडी उइके जैसे वरिष्ठ नेताओं का आशीर्वाद और मार्गदर्शन हमारे के लिए ऊर्जा का कारण बनता है।
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