मोहन सरकार पर बढ़ा दबाव, सीएम पद से वंचित दावेदारों की नाराज़गी अब हुई उजागर
Cabinet meeting: भोपाल, विशेष प्रतिनिधि। मध्य प्रदेश की राजनीति में बीते कुछ महीनों से जो दबे स्वर में असंतोष उभर रहा था, वह अब खुलकर सामने आ गया है। 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता परिवर्तन के साथ जो राजनीतिक असंतुलन की आशंका जताई जा रही थी, वह बुधवार की कैबिनेट बैठक में स्पष्ट दिखाई दी। मुख्यमंत्री पद से वंचित रहे दिग्गज नेताओं की नाराज़गी अब परोक्ष प्रहारों के रूप में सामने आ रही है।
तीन दिग्गजों की महत्वाकांक्षा पर विराम
भाजपा ने प्रचंड बहुमत के बाद जब शिवराज सिंह चौहान के स्थान पर डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी, तब तीन बड़े नेता —
- नरेंद्र सिंह तोमर
- प्रहलाद पटेल
- कैलाश विजयवर्गीय
मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। परंतु अचानक मोहन यादव का उभरना इन सभी के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।
विजयवर्गीय और पटेल को मंत्री पद मिला, तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन राजनीतिक आकांक्षाओं की आग भीतर ही भीतर सुलगती रही।
कैबिनेट बैठक बनी असंतोष का ट्रिगर
बुधवार की कैबिनेट बैठक में जीएसटी संग्रह में कमी का मुद्दा उठा। इसी दौरान कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल ने अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधा, हालांकि हमला उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के माध्यम से किया गया।
देवड़ा—जो शांत, सहज और विवादों से दूर रहने के लिए जाने जाते हैं—इस अचानक हुए हमले के केंद्र में आ गए। राजनीतिक गलियारों में इसे छिपे असंतोष का पहला ‘सार्वजनिक विस्फोट’ माना जा रहा है।
शिवराज सिंह चौहान की ‘मौन सहमति’ के संकेत?
विश्लेषकों का बड़ा वर्ग यह मान रहा है कि यह असंतोष केवल दो मंत्रियों की व्यक्तिगत नाराज़गी नहीं है। अंदरखाने दावा किया जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में शिवराज सिंह चौहान की मौन सहमति भी हो सकती है।
यह वही नेता हैं जिनकी बढ़ती ताकत से एक समय विजयवर्गीय और पटेल खुद असहज रहते थे, लेकिन राजनीति में समीकरण क्षणभर में बदल जाते हैं।
कांग्रेस ने मौके पर साधा निशाना
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तुरंत बयान जारी करते हुए कहा—
“भाजपा के कुछ मंत्री शिवराज सिंह चौहान की शह पर मोहन सरकार को अस्थिर करने में लगे हैं।” पटवारी ने इसे भाजपा की खुली अंदरूनी खींचतान का प्रमाण बताते हुए सरकार की स्थिरता पर भी सवाल उठाए।
क्या आगे बढ़ेगा ‘भीतरी लावा’?
कैबिनेट में उठा असंतोष महज शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इसके तीन संभावित रूप दिख सकते हैं—
- संगठन में बड़े फेरबदल
- मुख्यमंत्री पर दबाव बढ़ना
- या कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम
राज्य की राजनीति का पारा अब तेजी से चढ़ रहा है, और संकेत साफ हैं कि भाजपा के भीतर शक्ति-संतुलन की जंग अभी खत्म नहीं हुई है।
साभार…..
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