MP सरकार ने निकाय और व्यापार कानूनों में बड़े बदलाव को मंजूरी दी
Shift: मध्यप्रदेश सरकार नगर निकाय शासन और व्यापार से जुड़े कानूनों में व्यापक सुधार करने जा रही है। आगामी 1 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए जाएंगे, जिनके लागू होने के बाद प्रदेश की निकाय राजनीति और व्यवसायिक व्यवस्था दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
नगर पालिका/नगर परिषद अध्यक्ष का चुनाव अब सीधे जनता करेगी
अब तक नगर पालिका और नगर परिषदों में अध्यक्ष का चयन पार्षदों द्वारा किया जाता था। लेकिन सरकार ने इस प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए जनप्रतिनिधित्व को अधिक मजबूत करने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के मुख्य बिंदु:
- अध्यक्ष को सीधे जनता चुनेगी।
- राइट टू रिकॉल लागू होगा — जनता अध्यक्ष से असंतुष्ट होने पर मतदान करके उन्हें हटा भी सकेगी।
- इसका उद्देश्य निकायों को जवाबदेह, पारदर्शी और जनहितकारी बनाना है।
दुकान एवं स्थापना कानून पूरी तरह डिजिटल; साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य
मध्यप्रदेश कैबिनेट ने पिछले हफ्ते दुकान एवं स्थापना (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025 को मंजूरी दी, जिसके बाद राज्य की लगभग सभी व्यापारिक प्रक्रियाएँ डिजिटल हो जाएंगी।
रजिस्ट्रेशन अब सिर्फ ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से
- दुकान, प्रतिष्ठान, होटल, रेस्टोरेंट समेत सभी व्यवसायिक इकाइयों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह ऑनलाइन होगा।
- सेल्फ-सर्टिफिकेशन प्रणाली लागू होगी।
- कागजी प्रमाणपत्र के स्थान पर डिजिटल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।
- दुकान/प्रतिष्ठान शुरू होने के 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रहेगा।
- डिजिटल सर्टिफिकेट को प्रतिष्ठान के प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना होगा।
निरीक्षण प्रणाली में बड़ा बदलाव
छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए:
- 20 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में बिना श्रम आयुक्त की अनुमति के निरीक्षण नहीं होगा।
- इससे अनावश्यक दखल, दबाव और औचक कार्रवाई कम होगी।
सभी प्रक्रियाएँ अब पोर्टल पर
पूरी प्रणाली डिजिटल बनने के बाद पोर्टल पर निम्न सेवाएँ उपलब्ध होंगी:
- रजिस्ट्रेशन
- रिन्युअल
- संशोधन
- दुकान/प्रतिष्ठान बंद करने की सूचना
प्रतिष्ठान बंद करने पर 10 दिन के भीतर सूचना देना अनिवार्य होगा। सूचना मिलते ही रजिस्ट्रेशन स्वतः समाप्त हो जाएगा।
अधिकतम रजिस्ट्रेशन शुल्क ₹2,500; बदलाव 7 दिन में अपडेट करना जरूरी
- रजिस्ट्रेशन शुल्क अधिकतम ₹2,500 होगा।
- कर्मचारियों की संख्या या अन्य महत्वपूर्ण डेटा में बदलाव होने पर 7 दिन के भीतर अपडेट करना अनिवार्य।
दुकानदार और कामगारों को सप्ताह में एक दिन अनिवार्य अवकाश
संशोधन के अनुसार:
- सभी दुकानों और प्रतिष्ठानों में सप्ताह में एक दिन का अनिवार्य अवकाश देना होगा।
- सरकार के अनुसार यह कदम कामगारों के स्वास्थ्य, आराम, सामाजिक सुरक्षा एवं बेहतर कार्य वातावरण के लिए आवश्यक है।
सरकार का उद्देश्य
श्रम विभाग के अनुसार संशोधन का लक्ष्य:
- प्रक्रियाओं को 100% डिजिटल बनाना
- ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को मजबूत करना
- छोटे व्यापारियों को पारदर्शी और सरल व्यवस्था देना
- निरीक्षण प्रक्रिया को तार्किक और कम दखल वाली बनाना
- साभार…
Leave a comment