National Energy Conservation Day:: आज बिजली बचाना केवल आर्थिक निर्णय नहीं रह गया है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन से निपटने की सबसे सरल और प्रभावी रणनीति बन चुका है। घरों, कार्यालयों और संस्थानों में बचाई गई एक यूनिट बिजली लगभग एक किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के उत्सर्जन को रोकती है, साथ ही कोयला खनन, परिवहन और वायु प्रदूषण में भी कमी लाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आज बिजली व्यर्थ की जाती है तो उसका प्रभाव करीब 300 वर्षों तक वातावरण में बना रहता है, क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड की अनुमानित आयु इतनी ही होती है। ऐसे में बिजली बचत करना पर्यावरण संरक्षण और जलवायु सुधार की दिशा में सबसे आसान कदम है, जिसमें न नई तकनीक की जरूरत है, न नीतिगत बदलाव की और न ही किसी बड़े निवेश की—सिर्फ जागरूकता और सजगता पर्याप्त है।
भारत का बढ़ता पावर फुटप्रिंट, बढ़ती चिंता
भारत में प्रति व्यक्ति बिजली खपत वर्तमान में 1200–1300 यूनिट के बीच है और यह तेजी से बढ़ रही है। देश में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोयले पर आधारित होने के कारण CO₂ उत्सर्जन में बिजली क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
वैश्विक स्तर पर भी बिजली उत्पादन केंद्र ग्रीनहाउस गैसों के सबसे बड़े स्रोत माने जाते हैं, जो जलवायु परिवर्तन का प्रमुख कारण हैं। भारत का बढ़ता पावर फुटप्रिंट न केवल पर्यावरणीय बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।
आंकड़े जो चेतावनी देते हैं
- भारत में हर वर्ष लगभग 1,800 अरब यूनिट बिजली की खपत
- कुल ऊर्जा खपत में बिजली की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत
- कुल CO₂ उत्सर्जन में 40 प्रतिशत से अधिक योगदान बिजली क्षेत्र का
ऐसे करें बिजली की बचत, तुरंत दिखेगा असर
- दिन में अनावश्यक लाइट न जलाएं, इससे प्रतिदिन 0.5 से 1 यूनिट बिजली बच सकती है।
- इंडक्शन और माइक्रोवेव का सीमित उपयोग करें। ये एलपीजी की तुलना में कम दक्ष हैं और अधिक कार्बन उत्सर्जन करते हैं, जिससे रोज लगभग 1 यूनिट बिजली बचाई जा सकती है।
- सर्दियों में फ्रिज बंद रखें या न्यूनतम उपयोग करें। इससे महीने में 10–20 यूनिट बिजली की बचत संभव है।
- गीजर का उपयोग न करें। एक घंटे में लगभग 1 यूनिट बिजली बचाई जा सकती है। पानी एलपीजी पर गर्म करें और शॉवर की जगह बाल्टी-मग का प्रयोग करें।
- पंखे की गति 1–2 स्तर कम करें, इससे प्रति घंटे लगभग 0.03 यूनिट बिजली बचती है।
- एसी का तापमान 26°C या उससे अधिक रखें। केवल 1°C बढ़ाने से प्रति घंटे 1 यूनिट तक बिजली की बचत हो सकती है।
बिजली बचाना त्याग नहीं, समझदारी है
बिजली बचाना किसी प्रकार का त्याग नहीं, बल्कि संसाधनों के बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग का तरीका है। संस्थान और कार्यालय यदि सरल, व्यावहारिक दिशा-निर्देश अपनाएं तो अपव्यय कम किया जा सकता है, जागरूकता बढ़ाई जा सकती है और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
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