Budget: नई दिल्ली। देश के 80वें आम बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इस बार बजट पेश होने की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है। वजह यह है कि वर्ष 2026 में 1 फरवरी रविवार को पड़ रहा है और उसी दिन गुरु रविदास जयंती भी है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार परंपरा के अनुसार 1 फरवरी को ही बजट पेश करेगी या तारीख में बदलाव किया जाएगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2025 में गुरु रविदास जयंती 12 फरवरी को संसद के बजट सत्र के दौरान पड़ी थी, जिसके चलते उस दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित रही थी। इससे पहले 18 फरवरी 1981 को भी रविदास जयंती के कारण संसद की कार्यवाही नहीं हुई थी। यदि 1 फरवरी 2026 को बजट पेश किया जाता है तो 2017 में तारीख बदलने के बाद यह पहला मौका होगा, जब रविवार को बजट पेश होगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह लगातार आठवां बजट होगा और मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का दूसरा पूर्ण बजट भी होगा। इसके साथ ही वे लगातार आठ बजट पेश करने वाली देश की पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी।
सरकार परंपरा बनाए रखने के पक्ष में
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार 1 फरवरी को बजट पेश करने की परंपरा को बरकरार रखना चाहती है। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा है कि बजट की तारीख पर अंतिम निर्णय समय आने पर कैबिनेट कमेटी लेगी। चूंकि गुरु रविदास जयंती केंद्र सरकार की ‘रिस्ट्रिक्टेड हॉलिडे’ सूची में है, न कि सार्वजनिक अवकाश में, इसलिए रविवार होने के बावजूद संसद की विशेष बैठक बुलाकर बजट पेश किया जा सकता है।
अगर 1 फरवरी नहीं, तो ये हो सकते हैं विकल्प
यदि किसी कारणवश 1 फरवरी को बजट पेश नहीं होता है, तो सरकार के पास दो विकल्प हो सकते हैं। पहला, 31 जनवरी (शनिवार) को बजट पेश किया जाए, जैसा कि पहले भी कुछ वर्षों में किया गया है। दूसरा विकल्प 2 फरवरी (सोमवार) का हो सकता है। इससे पहले अंग्रेजों के समय से लेकर 2016 तक बजट फरवरी के अंतिम कार्यदिवस यानी 28 या 29 फरवरी को पेश किया जाता था। 2017 में मोदी सरकार ने इसे बदलकर 1 फरवरी कर दिया था।
निर्मला सीतारमण बनाएंगी नया रिकॉर्ड
बजट 2026-27 के साथ निर्मला सीतारमण पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के आठ पूर्ण बजट के रिकॉर्ड की बराबरी कर लेंगी। हालांकि, वे यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली लगातार दो सरकारों में हासिल करने वाली पहली वित्त मंत्री होंगी।
रविवार को संसद चलने के उदाहरण भी रहे हैं
संसद के इतिहास में रविवार या छुट्टियों के दिन भी कार्यवाही के कई उदाहरण हैं। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान और 2012 में संसद की 60वीं वर्षगांठ पर रविवार को बैठक हुई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बजट एक संवैधानिक प्रक्रिया है, इसलिए आवश्यकता पड़ने पर रविवार को भी संसद की कार्यवाही संभव है।
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