आधुनिक डिवाइस से पहले ही पकड़ी जाएगी पहियों की खराबी
Modern devices:भोपाल। भोपाल से चलने वाली कई यात्री और एक्सप्रेस ट्रेनें तकनीकी खराबी के कारण अक्सर बीच रास्ते में खड़ी हो जाती हैं। कभी पहियों में गड़बड़ी आ जाती है तो कभी किसी कोच की मशीनरी में दिक्कत सामने आती है। सुरक्षा कारणों से ट्रेन रोकनी पड़ती है, जिससे यात्रियों को घंटों की देरी का सामना करना पड़ता है। अब रेलवे को इस समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
रेलवे ने ट्रेनों के पहियों की जांच के लिए आधुनिक कैलिप्री व्हील प्रोफाइलोमीटर डिवाइस को मेंटेनेंस सिस्टम में शामिल किया है। इस उपकरण की मदद से पहियों में आने वाली खराबी का समय रहते पता लगाया जा सकेगा और मरम्मत पहले ही कर ली जाएगी, जिससे ट्रेनों के बीच रास्ते में रुकने की घटनाएं कम होंगी।
डिवाइस में रिकॉर्ड होता है पूरा डेटा
कैलिप्री व्हील प्रोफाइलोमीटर एक आधुनिक डिजिटल उपकरण है, जो पहियों के व्हील प्रोफाइल का सटीक मापन करता है। इसे पहिए की रिम पर लगाया जाता है, जहां इसके सेंसर सतह के संपर्क में आकर फ्लैंज की ऊंचाई और मोटाई, ट्रेड की चौड़ाई तथा हालोनेस जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को मापते हैं।
मापन के दौरान प्राप्त पूरा डेटा तुरंत डिवाइस में रिकॉर्ड हो जाता है। कई मॉडलों में यह डेटा ब्लूटूथ या यूएसबी के माध्यम से मोबाइल या लैपटॉप से जोड़ा जा सकता है। इसके बाद सॉफ्टवेयर की मदद से मापे गए आंकड़ों की तुलना रेलवे के मानकों, जैसे आईआरएस और आरडीएसओ, से की जाती है। इससे पहियों की फिटनेस और मरम्मत की आवश्यकता स्पष्ट हो जाती है।
समय रहते होगा मेंटेनेंस
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पहियों की घिसावट का ट्रेंड पहले ही सामने आ जाता है। इससे समय पर मेंटेनेंस संभव हो सकेगा और ट्रेनों को बीच रास्ते में रोकने की नौबत कम आएगी। यात्रियों को अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी। साथ ही, यह प्रणाली मैनुअल गेज की तुलना में अधिक सटीक, तेज और मानवीय त्रुटियों से मुक्त मानी जा रही है।
पहले डेटा सुरक्षित रखना था चुनौती
पहले रेलवे में पहियों की जांच मैनुअल गेज के जरिए की जाती थी, जिसमें मापन काफी हद तक कर्मचारियों के अनुभव पर निर्भर रहता था। रिकॉर्ड लिखित रूप में होने के कारण डेटा सुरक्षित रखना और पुराने मापों से तुलना करना कठिन होता था। वहीं, कैलिप्री व्हील प्रोफाइलोमीटर से डिजिटल मापन होता है और पूरा डेटा स्वतः सॉफ्टवेयर में सेव हो जाता है, जिससे विश्लेषण और समय पर मरम्मत आसान हो जाती है।
मेंटेनेंस सिस्टम में किया शामिल
कोचिंग डिपो ऑफिसर शिवम त्रिवेदी ने बताया कि,
“ट्रेन के पहिए रेल परिचालन की सबसे अहम कड़ी होते हैं। फ्लैंज, ट्रेड या हालोनेस में असामान्य घिसावट न केवल सफर को असहज बनाती है, बल्कि दुर्घटना का खतरा भी बढ़ाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कैलिप्री व्हील प्रोफाइलोमीटर जैसे आधुनिक पोर्टेबल उपकरण को मेंटेनेंस सिस्टम में शामिल किया गया है।”
साभार..
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