रेजिडेंट ऑफिसर की साठगांठ का खुलासा, प्रतिमाह करोड़ों की चपत
Loss: भोपाल। मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (MPPGCL) के पावर प्लांटों में घटिया और मिट्टीयुक्त कोयले की आपूर्ति से कंपनी को प्रतिमाह लाखों–करोड़ों रुपये का नुकसान होने का खुलासा हुआ है। मंडल सूत्रों के अनुसार, कोल वॉशरी और खदानों से आने वाले कोयले की गुणवत्ता की निगरानी में गंभीर लापरवाही बरती गई है।
सूत्रों का कहना है कि कोयला परिवहन करने वाले वाहनों में जीपीएस सिस्टम और सीलिंग लगाए जाने के निर्देश रेजिडेंट ऑफिसर द्वारा नहीं दिए गए। इसके अलावा कोयले की सैंपलिंग प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई है, जिससे घटिया कोयला पावर प्लांटों तक पहुंच रहा है।
कोयला वॉशरी कंपनियों से साठगांठ के आरोप
जानकारी के मुताबिक, खराब कोयले की आपूर्ति रोकने और कोयले को वॉश कर भेजने की जिम्मेदारी रेजिडेंट ऑफिसर को सौंपी गई थी, लेकिन इसी स्तर पर कोयला सफाई का ठेका लेने वाली कंपनियों से साठगांठ की बात उजागर हुई है। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन लागत और संयंत्रों की कार्यक्षमता पर पड़ा है।
कम आपूर्ति और सैंपलिंग गायब
मंडल सूत्रों ने बताया कि कोल वॉशरी और वणी खदान से आपूर्ति किए गए कोयले में भारी मात्रा में मिट्टी पाई गई है। इसके अलावा पावर प्लांटों को प्रतिमाह 40 से 45 हजार मीट्रिक टन कोयले की कम आपूर्ति हुई है। गंभीर बात यह है कि 44 कोयला सैंपल गायब पाए गए हैं, जिससे गुणवत्ता जांच ही संभव नहीं हो सकी।
कंपनी को करोड़ों का नुकसान
इन अनियमितताओं के चलते मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को करोड़ों रुपये की आर्थिक चपत लगी है। मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग उठ रही है, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
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