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New plan: मनरेगा का नाम बदला, अब VB-G RAM G: मध्यप्रदेश में गांव-गांव पहुंचेगी सरकार, मंत्री बताएंगे नई योजना के फायदे

मनरेगा का नाम बदला, अब VB-G RAM

125 दिन रोजगार, साप्ताहिक भुगतान और हाईटेक निगरानी—भाजपा ने शुरू किया प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान

New plan:भोपाल। केंद्र सरकार ने सौ दिनों का रोजगार देने वाली महात्मा गांधी नेशनल ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर VB-G RAM G (विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, ग्रामीण) कर दिया है। इस बदलाव के बाद मध्यप्रदेश की मोहन यादव सरकार और भाजपा संगठन ने इसे लेकर प्रदेशभर में व्यापक जनजागरण अभियान शुरू करने का फैसला किया है।

इस अभियान के तहत राज्य सरकार के मंत्री जिले-जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नई योजना के नाम और नियमों में किए गए बदलावों के फायदे जनता को बताएंगे। इसके लिए मंत्रियों की जिलेवार ड्यूटी तय कर दी गई है। अभियान की औपचारिक शुरुआत बुधवार 7 जनवरी को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस से हो चुकी है।

नई योजना को लेकर गांव-गांव पहुंचेगी भाजपा
मनरेगा के स्थान पर लाए गए नए कानून VB-G RAM G (विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन, ग्रामीण) को लेकर भाजपा पूरे प्रदेश में संगठित अभियान चलाएगी। प्रदेश कार्यालय से जारी परिपत्रों और दिशा-निर्देशों के अनुसार मंत्री, सांसद, विधायक और संगठन पदाधिकारी गांव-गांव जाकर लोगों को नई योजना के लाभ समझाएंगे और नाम परिवर्तन को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देंगे।

ग्रामीण विकास में क्रांतिकारी कदम: भाजपा का दावा
भाजपा का दावा है कि संसद में पारित VB-G RAM G विधेयक 2025 ग्रामीण विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। पार्टी के अनुसार यह कानून मनरेगा की कमियों को दूर करते हुए रोजगार, आजीविका और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा। अभियान के दौरान किसानों, कृषि श्रमिकों, ग्रामीण मजदूरों और पंचायत प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया जाएगा।

मनरेगा से आगे क्यों VB-G RAM G
भाजपा द्वारा जारी “टॉकिंग पॉइंट्स” के अनुसार नई योजना में हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जो मनरेगा के 100 दिन से अधिक है। अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिलेंगे।

इसके अलावा मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक किया जा सकेगा, जबकि मनरेगा में इसके लिए 15 दिन तक इंतजार करना पड़ता था। योजना में GPS, मोबाइल मॉनिटरिंग और AI आधारित फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लागू किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी।

मनरेगा पर सबसे अधिक खर्च मोदी सरकार ने किया
भाजपा नेताओं को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता को बताएं कि मनरेगा पर अब तक सबसे ज्यादा खर्च मोदी सरकार ने किया है। पार्टी के अनुसार ग्रामीण गरीबी 2011-12 में 25.7 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में घटकर 4.86 प्रतिशत रह गई है। भाजपा का तर्क है कि बदली हुई ग्रामीण अर्थव्यवस्था में 2005 का ओपन-एंडेड मॉडल अब प्रभावी नहीं रहा, इसलिए योजना का पुनर्गठन जरूरी था।

नाम बदलने पर विपक्ष के आरोपों का जवाब
अभियान के दौरान कांग्रेस के “नाम बदलने” संबंधी आरोपों का भी जवाब दिया जाएगा। भाजपा नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे जनता को बताएं कि

  • रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं के नाम बदलने की परंपरा कांग्रेस सरकारों के समय से चली आ रही है।
  • इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर सैकड़ों योजनाएं, संस्थान और पुरस्कार रखे गए।
  • मोदी सरकार में “नाम नहीं, काम बोलता है” और योजनाओं को सेवा व जनकल्याण से जोड़ा गया है।

जिले-जिले में कार्यक्रम, चौपाल से रैली तक
प्रदेश परिपत्र के अनुसार जिला मुख्यालयों पर प्रेस वार्ता और प्रस्तुतिकरण होंगे। इसके अलावा जिला, मंडल और ग्राम स्तर पर किसान-मजदूर चौपाल, घर-घर संपर्क अभियान, ट्रैक्टर और बैलगाड़ी रैली, पदयात्राएं, पंचायत प्रतिनिधियों और सहकारी संस्थाओं के सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से मंत्री और जनप्रतिनिधि सीधे जनता को बताएंगे कि VB-G RAM G किस तरह रोजगार, जल सुरक्षा, ग्रामीण सड़कों, आजीविका ढांचे और जलवायु-अनुकूल कार्यों के जरिए गांवों की आय बढ़ाने में मदद करेगी।

2047 के विकसित भारत से जोड़ा जाएगा अभियान
भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि इस जनजागरण अभियान का उद्देश्य VB-G RAM G को विकसित भारत 2047 के विजन से जोड़ना और इसे ग्रामीण परिवर्तन की मजबूत नींव के रूप में स्थापित करना है। पार्टी का मानना है कि सही जानकारी और संवाद के जरिए विपक्ष के “किसान-विरोधी” और “गरीब-विरोधी” दुष्प्रचार को जमीनी स्तर पर बेअसर किया जा सकेगा।

साभार…. 

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