Inauguration: नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने संबोधन में बताया कि पीएमओ का नाम सेवा तीर्थ क्यों रखा गया और इसके पीछे क्या दर्शन है।
प्रधानमंत्री ने कहा,
“सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है। यही हमारी पहचान है।”
उन्होंने कहा कि नाम बदलने के पीछे स्वतंत्र भारत की सोच और उसकी नई पहचान छिपी है।
🇮🇳 गुलामी की सोच से आज़ाद भारत की ओर
पीएम मोदी ने कहा कि आज़ादी के बाद देश के बड़े फैसले साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतों से लिए गए, लेकिन ये इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य की मानसिकता की प्रतीक थीं।
उन्होंने कहा,
“इन भवनों को भारत को गुलामी की जंजीरों में जकड़े रखने की सोच से बनाया गया था।”
वहीं अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे नए परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं।
🚀 नए भारत को मिलेगा नया आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत रिफॉर्म एक्सप्रेस पर सवार है, दुनिया में नए व्यापार समझौते कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान बना रहा है। ऐसे समय में सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों से काम करने वाले अधिकारी देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
उन्होंने कहा,
“यहां से जो फैसले होंगे, वे किसी महाराजा की नहीं बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की सोच को आगे बढ़ाएंगे।”
🏛️ पुराने भवन बनेंगे संग्रहालय
पीएम मोदी ने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक से जुड़े ऐतिहासिक फैसलों की स्मृतियां देश के साथ रहेंगी। इसलिए सरकार ने तय किया है कि पुराने पीएमओ परिसर को देश को समर्पित एक संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारत के प्रशासनिक इतिहास को जान सकें।
🔥 2014 से गुलामी की मानसिकता बदलने का संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 के बाद देश ने गुलामी की मानसिकता से बाहर निकलने का संकल्प लिया।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा —
- नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण
- पुलिस स्मारक की स्थापना
- रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया जाना
ये सब सिर्फ नाम बदलने नहीं बल्कि सत्ता के मिज़ाज को सेवा की भावना में बदलने के प्रयास हैं।
साभार…
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