खाड़ी देशों में जारी जंग से नर्मदापुरम के बासमती चावल कारोबार को करोड़ों का झटका
Tension: इजराइल, अमेरिका और ईरान सहित खाड़ी देशों में छिड़े युद्ध (Iran–Israel War) का सीधा असर अब मध्यप्रदेश में भी देखने को मिल रहा है। नर्मदापुरम जिले के बासमती चावल कारोबार पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ा है। समुद्री मार्ग से आवागमन लगभग बंद होने के कारण पिपरिया के कारखानों का करोड़ों रुपए का चावल देश के बंदरगाहों पर अटका पड़ा है। रोजाना गल्फ देशों में लगभग 20 से 25 टन बासमती चावल का निर्यात होता था, लेकिन माल का उठाव नहीं होने से कारखानों के गोदाम भर गए हैं। युद्ध शुरू होने के पहले ही दिन से धान के दामों में भी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे व्यापारी और किसान दोनों परेशान हैं।
🛳️ खाड़ी देशों में नर्मदापुरम के बासमती की खास मांग
ईराक, जॉर्डन, कुवैत, दुबई सहित खाड़ी देशों में नर्मदापुरम जिले के बासमती चावल की खासी मांग रहती है। अरब देशों में बिरयानी जैसे व्यंजनों में बासमती चावल का विशेष उपयोग किया जाता है। देश और विदेश के व्यापारी पिपरिया, इटारसी और आसपास के कारखानों से सीधे या अड़तियों के माध्यम से चावल खरीदते हैं। यहां से माल सड़क मार्ग से बंदरगाह तक पहुंचता है और फिर जहाजों के जरिए अरब देशों को निर्यात किया जाता है।
📦 बंदरगाह और गोदामों में फंसा करोड़ों का माल
मिडिल ईस्ट में जारी जंग के चलते समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है। कारखानों से भेजा गया करोड़ों रुपए का चावल बंदरगाहों और स्थानीय गोदामों में ही अटका हुआ है। पिपरिया के अधिकांश चावल गोदाम खाड़ी देशों के लिए तैयार माल से भरे पड़े हैं। निर्यात के लिए विशेष पैकिंग की जाती है, जिससे कारखानों पर अतिरिक्त लागत आती है। माल का उठाव नहीं होने से निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो इसका सीधा असर किसानों की आमदनी और स्थानीय व्यापार पर पड़ेगा।
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