आबकारी अधिकारी को कमिश्रर ने किया निलंबित
Proceeding: बैतूल। जिले की सभी शराब दुकानों की नीलामी नहीं होने के कारण जिला आबकारी अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह चिडार को आबकारी आयुक्त मध्यप्रदेश ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कल शाम आबकारी आयुक्त मध्यप्रदेश दीपक कुमार सक्सेना द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि बैतूल जिले में मदिरा दुकानों के संचालन एवं राजस्व हितों के संरक्षण में अपेक्षित प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे शासन द्वारा निर्धारित राजस्व लक्ष्य की पूर्ति नहीं हो सकी। इसे प्रशासनिक अनियमितता मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत यह कार्रवाई की गई। निलंबन अवधि के दौरान अधिकारी का मुख्यालय उपयुक्त आबकारी कार्यालय, संभागीय उडऩदस्ता भोपाल निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
72 करोड़ रुपये की आठ दुकानें नहीं हुईं नीलामी
जिले में कुल 61 शराब दुकानों की नीलामी शासकीय दर 304 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक कीमत में की जानी थी। इसके लिए मार्च माह के अंतिम सप्ताह से नीलामी की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। इसमें अब तक 53 दुकानों की ही नीलामी की जा सकी है। शेष आठ दुकानों के लिए सोमवार को आफसेट प्राइज में 30 प्रतिशत की कमी कर ई टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई लेकिन शाम तक किसी ने भी नीलामी में भाग नहीं लिया। शासन ने इसे राजस्व की हानि मानते हुए जिला आबकारी अधिकारी को निलंबित कर दिया है।
इन दुकानों की नहीं हुई नीलामी
जिले में कुल 61 दुकानों में से 53 की नीलामी की जा चुकी है। शेष बची दुकानों में बैतूल गंज की एक दुकान जिसकी आफसेट कीमत 18 करोड़ रुपये से अधिक है। बैतूलबाजार की दो शराब दुकानें, सारनी की एक ,बगडोना की एक , आमला की एक और भैंसदेही की दो शराब दुकानें शामिल हैं।
बैतूलबाजार 1,2-8 करोड़ 73 लाख, 6 करोड़ 10 लाख की।
सारनी 1-नौ करोड़ 65 लाख।
बगडोना- 10 करोड़ 99 लाख
आमला 1 दस करोड़ की
भैंसदेही 1 और 2- 5 करोड़ 31 और 5 करोड़ 12 लाख
बैतूल गंज
आज आठ दुकानों के ई टेंडर निकाले गए
आफसेट से 30 प्रतिशत कम
बैतूल जिले के आबकारी
आठ बची
कुल 61 दुकानों में से 53 की नीलामी—
गंज 1 -18 करोड़
बैतूलबाजार 1,2-8 करोड़ 73 लाख, 6 करोड़ 10 लाख की।
सारनी 1-नौ करोड़ 65 लाख।
बगडोना- 10 करोड़ 99 लाख
आमला 1 दस करोड़ की
भैंसदेही 1 और 2- 5 करोड़ 31 और 5 करोड़ 12 लाख
304 करोड़ 29 लाख की थी।
72 करोड़ का शेष रह गया है
विभाग को चलाना पड़ रहा है।
गत वर्ष-253 करोड़ में गईं थीं।
20 प्रतिशत बढ़ाई गई।
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